अपनी किताब 'व्हाई भारत मैटर्स' पर बोलते हुए उन्होंने कहा, आज हम अपनी बात पर कायम हैं। चाहे वह यूक्रेन संघर्ष और उसके साथ आने वाले दबाव का जटिल मुद्दा हो या हिंद-प्रशांत क्षेत्र में क्या हो रहा है और हम कैसे सुनिश्चित करते हैं कि वहां स्थिरता हो। हम पर क्वाड में शामिल न होने का दबाव था। हम पर रूस के साथ हमारे आर्थिक लेन-देन को सीमित करने दबाव था। हम दोनों के खिलाफ मजबूती से खड़े रहे।
कश्मीर मुद्दे पर उन्होंने कहा, आज यह बहुत स्पष्ट है कि कश्मीर मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में ले जाना एक बुनियादी गलती थी। हमें उन देशों के एक समूह ने धोखा दिया था, जिन्होंने अपने भू-राजनीतिक एजेंडे और कश्मीर में असुरक्षा के मुद्दे का इस्तेमाल किया। जयशंकर ने कहा कि हकीकत में यह अभी नहीं बल्कि 1970 के दशक तक बहुत स्पष्ट हो गया था।
जयशंकर ने केंद्र की मोदी सरकार से पहले और बाद की विदेश नीति के अंतर पर भी बात की। उन्होंने कहा, सोचने का नया तरीका ही जवाब है। उदाहरण के लिए, हमारे पड़ोसियों को लें। उन्हें भागीदार बनाएं न कि ऐसा प्रतिस्पर्धी जो आपसे ईर्ष्या करते हैं। ऐसे पड़ोसी बनएं जो आपसे लाभान्वित हों। हमारे पड़ोसी आज भारत को शिक्षा औऱ सवास्थ्य से जोड़कर देखते हैं। वे नया पावर लिंकेज देखते हैं। हम अपने इतिहास को फिर से हासिल कर रहे हैं। यदि आप पुरातत्व के अनुसार देखें तो वियतनाम के मध्य में हजारों साल पुराने शिव मंदिर हैं। खाड़ी में देखें 60 और 70 के दशक तक भारतीय रुपया वैध मुद्रा थी। हमने इन संपर्कों को छोड़ दिया था क्योंकि हमारे पास खुद को लेकर एक छोटा दृष्टिकोण (विजन) था। आज हम अपने पंख फैला रहे हैं।
उन्होंने आगे कहा, दुनिया वास्वत में आज हमारे जैसा देश बनना चाहती है, ताकि स्थापित शक्तियों के बीच संतुलन बनाया जा सके। हम पर क्वाड से न जुड़ने का दबाव था। हम पर रूस के साथ अपने आर्थिक लेन-देन को सीमित करने का दबाव था। हम दोनों के खिलाफ मजबूती से खड़े रहे हैं। दुनिया में ऐसी कोई चर्चा नहीं है, जिसमें हम अपने विचार सामने न रख रहे हों। यही अंतर है।
अमेरिकी राजदूत को बंगलूरू में जल्द वाणिज्य दूतावास खोलने की याद दिलाऊंगा: जयशंकर
विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि वह अमेरिकी राजदूत के साथ अपनी अगली बैठक में बंगलूरू में अमेरिकी वाणिज्य दूतावास खोलने का मुद्दा उठाएंगे। बंगलूरू दक्षिण से सांसद तेजस्वी सूर्या के साथ अपनी नई किताब पर चर्चा के दौरान उन्होंने कहा, तेजस्वी और मैं अक्सर संसद में मिलते रहते थे और हर अवसर पर वह अमेरिकी वाणिज्य दूतावास के विषय को उठाते थे। मैंने उनसे तब अमेरिकी राजदूत (केनेथ जस्टर) से मिलने और वहां अनुरोध करने के लिए भी कहा था, जो उन्होंने (मार्च 2020 में) किया।
उन्होंने कहा, 'मुझे खुशी है कि हम पिछले साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिका यात्रा के दौरान बंगलूरू में अमेरिकी वाणिज्य दूतावास खोलने का फैसला ले सके।' उन्होंने कहा, 'बंगलूरू एक वैश्विक शहर है और यह स्वाभाविक है कि यहां एक अमेरिकी वाणिज्य दूतावास होना चाहिए। मैं जाकर एरिक गार्सेटी (भारत में अमेरिका के मौजूदा राजदूत) को याद दिलाऊंगा कि उन्हें इसे तेजी से स्थापित करने की जरूरत है।' 22 जून 2023 को पीएम मोदी की अमेरिका यात्रा के दौरान यह घोषणा की गई थी कि अमेरिका बंगलूरू और अहमदाबाद में दो नए वाणिज्य दूतावास खोलेगा, जबकि भारत सिएटल में एक मिशन स्थापित करेगा।