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Karnataka: आंबेडकर विकास निगम में 16.85 करोड़ का भूमि घोटाला, फर्जी दस्तावेज तैयार कर जमीन हथियाने की साजिश

Sun, 05 Jan 2025 05:04 AM IST
दीपक कुमार शर्मा एजेंसी, बंगलूरू

सार

लोकायुक्त के मुताबिक, एक शख्स ने शिकायत की थी कि विजयपुरा जिला अंबेडकर विकास निगम ने 2014 से 2018 तक भूमि स्वामित्व योजना के तहत अनुसूचित जाति की भूमिहीन महिला कृषि श्रमिकों को जमीन वितरित नहीं की। इसके बजाय लाभार्थियों के नाम पर फर्जी खरीद दस्तावेज बनाकर निगम के नाम का इस्तेमाल कर सही लाभार्थियों को भुगतान किए बगैर यह जमीन खरीद गई। 
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सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
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कर्नाटक के विजयपुरा जिला आंबेडकर विकास निगम में 16.85 करोड़ रुपये का भूमि आवंटन घोटाला सामने आया है। इसके तहत जमीन के फर्जी दस्तावेज तैयार कर अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) की भूमिहीन महिलाओं को बांटी जाने वाली जमीन हथियाने की साजिश रची गई। यह जानकारी शनिवार को लोकायुक्त की तरफ से जारी की गई।

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लोकायुक्त के मुताबिक, एक शख्स ने शिकायत की थी कि विजयपुरा जिला अंबेडकर विकास निगम ने 2014 से 2018 तक भूमि स्वामित्व योजना के तहत अनुसूचित जाति की भूमिहीन महिला कृषि श्रमिकों को जमीन वितरित नहीं की। इसके बजाय लाभार्थियों के नाम पर फर्जी खरीद दस्तावेज बनाकर निगम के नाम का इस्तेमाल कर सही लाभार्थियों को भुगतान किए बगैर यह जमीन खरीद गई। 

पांच दिन मारे गए आरोपियों के दफ्तरों और आवासों पर छापे
जांच के बाद 26 दिसंबर, 2024 को आईपीसी की कई धाराओं के तहत विजयपुरा लोकायुक्त पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया। लोकायुक्त पुलिस ने 30 दिसंबर से पांच दिनों तक अंबेडकर विकास निगम के पूर्व जिला प्रबंधकों रेणुका सतरले, एस जी हडपाड़ा, सेवानिवृत्त तालुक विकास अधिकारी एस एस मनागिरी (सेवानिवृत्त) और निगम के वर्तमान जिला प्रबंधक और तालुक विकास अधिकारी के कार्यालय और आवासों पर छापे मारे थे।
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भूमि स्वामित्व योजना से जुड़ी 23 फाइलें गायब
जांच में सामने आया कि निजी बैंकों में अवैध रूप से खाते खोले गए, अयोग्य लाभार्थियों को जमीन आवंटित की गई और भूमि स्वामित्व योजना के तहत एक ही परिवार को जमीन आवंटित की गई। लोकायुक्त ने कहा कि जांच में सामने आया कि 2012 से 2018 तक भूमि स्वामित्व योजना से जुड़ी 23 फाइलें दफ्तर से गायब थीं। अब तक की तलाशी में पाया गया है कि 33 फाइलों में फर्जी खरीद दस्तावेज, पंजीकरण और स्टांप शुल्क रसीदें बनाई गई थीं। इससे सरकारी खजाने को लगभग 16.84 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। मामले की जांच आगे जारी है। 

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