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Karnataka: गन्ना किसानों का बवाल, 20 से ज्यादा ट्रैक्टरों में लगाई आग; समर्थन मूल्य को लेकर भड़के प्रदर्शनकारी

Thu, 13 Nov 2025 08:02 PM IST
हिमांशु चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू

सार

कर्नाटक के बागलकोट जिले में गन्ना किसानों का विरोध हिंसक हो गया। समर्थन मूल्य की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे किसानों ने 20 से ज्यादा ट्रैक्टरों को आग के हवाले कर दिया। पुलिस के दखल के बावजूद हालात बेकाबू रहे। किसान 3500 रुपये प्रति टन का समर्थन मूल्य तय करने और बकाया भुगतान की मांग पर अड़े हैं।
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किसानों का प्रदर्शन (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : ANI
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विस्तार
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कर्नाटक के बागलकोट जिले के मुद्होल में गुरुवार को गन्ना किसानों का गुस्सा बेकाबू हो गया। समर्थन मूल्य की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे किसानों ने दर्जनों अधिक गन्ना लदे ट्रैक्टरों में आग लगा दी। यह आगजनी उस वक्त हुई जब किसान गन्ना लेकर शुगर फैक्ट्रियों की ओर जा रहे थे और उन्होंने रास्ते में ट्रैक्टरों को पलट दिया।
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माना जा राह है कि किसान लंबे समय से प्रति टन 3500 रुपये का समर्थन मूल्य तय करने की मांग कर रहे हैं। फैक्ट्री मालिकों से बातचीत के बावजूद समाधान नहीं निकलने पर गुस्साए किसानों ने हिंसक रूप ले लिया। उन्होंने सांगनट्टी क्रॉस इलाके में महालिंगपुर के पास गन्ना लदे ट्रैक्टरों को पलटकर आग के हवाले कर दिया। इस दौरान पुलिस ने हालात संभालने की कोशिश की, लेकिन स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई।

फैक्ट्री प्रबंधन पर गुस्सा और हंगामा
किसानों का आरोप है कि फैक्ट्री मालिक उनकी बात सुनने के लिए मंच पर तक नहीं पहुंचे। इसी नाराजगी में किसानों ने फैक्ट्री गेट की ओर कूच किया और वहीं खड़े ट्रैक्टरों की लंबी कतार में आग लगा दी। फैक्ट्री परिसर के बाहर भी कई गन्ना लदे ट्रॉली खड़े थे जिन्हें प्रदर्शनकारियों ने पलट दिया। बताया गया कि आग इतनी तेज थी कि आस-पास का इलाका धुएं से भर गया।
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पुलिस की कार्रवाई और मौके की स्थिति
स्थानीय पुलिस और दमकल विभाग के कर्मियों ने मौके पर पहुंचकर आग पर काबू पाने की कोशिश की। हालांकि, कई ट्रैक्टर पूरी तरह जलकर खाक हो गए। पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए हल्का बल प्रयोग किया और कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। घटना के बाद इलाके में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है ताकि हालात फिर से बिगड़ें नहीं।
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किसानों की मांगें और प्रशासन की प्रतिक्रिया
किसानों का कहना है कि जब तक बकाया भुगतान नहीं किया जाता और शुगर फैक्ट्रियों का संचालन फिर से शुरू नहीं होता, वे आंदोलन जारी रखेंगे। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि उनकी मांगों पर विचार किया जा रहा है। वहीं, राज्य सरकार ने नुकसान का आंकलन करने और मामले की जांच के आदेश दिए हैं।
 
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