उच्च न्यायालय ने शिवमूर्ति शरण के खिलाफ दो पॉक्सो मामलों में से एक में जमानत के लिए कई शर्तें लगाई हैं। इसमें एक शर्त यह है कि वह जांच पूरी होने तक चित्रदुर्ग जिले में नहीं जा सकते हैं।
यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम के तहत आरोपों का सामना कर रहे चित्रदुर्ग मुरुघराजेंद्र ब्रुहान मठ के प्रमुख शिवमूर्ति शरण को गुरुवार को जेल से रिहा कर दिया गया। वह पिछले साल सितंबर से जेल में बंद थे।
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आठ नवंबर को संत को जमानत दी थी
कर्नाटक उच्च न्यायालय ने आठ नवंबर को संत शरण को जमानत दे दी थी। जिला मुख्यालय शहर में द्वितीय अतिरिक्त जिला एवं सत्र अदालत ने बुधवार को एक आदेश जारी कर जिला जेल अधिकारियों को उच्च न्यायालय द्वारा लगाई गई शर्तों की जांच करने और दस्तावेजों की पुष्टि करने के बाद संत को रिहा करने का निर्देश दिया।
मठ की दावणगेरे शाखा में रहने की संभावना
अधिकारियों ने बताया कि आदेश की प्रति संबंधित अधिकारियों तक समय पर नहीं पहुंचने के कारण संत शरण को बुधवार को रिहा नहीं किया जा सका। जमानत की शर्तों के अनुसार उन्हें चित्रदुर्ग से बाहर स्थानांतरित किया जाएगा। खबरों के मुताबिक उनके मठ की दावणगेरे शाखा में रहने की संभावना है।
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कई शर्तें लगाई गईं
उच्च न्यायालय ने शिवमूर्ति शरण के खिलाफ दो पॉक्सो मामलों में से एक में जमानत के लिए कई शर्तें लगाई हैं। इसमें एक शर्त यह है कि वह जांच पूरी होने तक चित्रदुर्ग जिले में नहीं जा सकते हैं। उन्हें दो लाख रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि के दो मुचलके पर जमानत दी गई है और सबूतों के साथ छेड़छाड़ नहीं करने या गवाहों को प्रभावित नहीं करने की चेतावनी दी गई है।
उच्च न्यायालय ने इस मामले में 13 अक्तूबर को आरोपी परमशिवैया को पहले ही जमानत दे दी थी।
यह है मामला
मैसूर के गैर सरकारी संगठन 'ओडानादी सेवा संस्थान' ने मठ के स्कूल में पढ़ने वाली नाबालिग छात्राओं और छात्रावास में रहने वाली छात्राओं के यौन उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए मठ के पादरी और चार अन्य लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी।