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कर्नाटक: येदियुरप्पा के ताज पर सुप्रीम कोर्ट में फैसला आज, हैदराबाद पहुंचे कांग्रेस-जेडीएस के विधायक

Fri, 18 May 2018 06:20 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू
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बीएस येदियुरप्पा ने सिर पर लटकती राजनीतिक अनिश्चितता की तलवार के साथ बृहस्पतिवार को तीसरी बार कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद की कुर्सी संभाल ली। उन्हें गुरुवार सुबह नौ बजे राज्यपाल वजुभाई वाला ने पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। बहुमत के जादुई आंकड़े से दूर रहने के बावजूद राज्यपाल ने बुधवार देर शाम को येदियुरप्पा को विधानसभा में सबसे बड़ी पार्टी के नेता के तौर पर सरकार बनाने का न्योता दिया था।
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सुप्रीम कोर्ट ने राज्यपाल के फैसले में दखल देने से किया इनकार

जेठमलानी ने भी दायर की याचिका, शीर्ष कोर्ट में सुनवाई आज


राज्य में भाजपा के सबसे कद्दावर नेता येदियुरप्पा ने किसानों और ईश्वर के नाम पर अकेले शपथ ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह शपथ ग्रहण समारोह में शामिल नहीं हुए। येदियुरप्पा को शपथ दिलाए जाने को जहां कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने लोकतंत्र की हत्या करार दिया, वहीं शाह ने कहा कि जदएस से गठबंधन करके अवसरवादी कांग्रेस ने प्रजातंत्र का गला घोंटा है। इस बीच, नवनियुक्त मुख्यमंत्री ने कहा कि वे बहुमत साबित करने को लेकर 100 फीसदी आश्वस्त हैं और इसके लिए वे 15 दिन का इंतजार नहीं करेंगे।

कोर्ट में चली लड़ाई

इससे पहले उन्हें शपथ लेने से रोकने के लिए कांग्रेस और जदएस ने बुधवार को रात 10 बजे सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। बुधवार देर रात से बृहस्पतिवार सुबह लगभग छह बजे तक चली सुनवाई के बाद शीर्ष अदालत ने राज्यपाल के फैसले में दखल देने से इनकार कर दिया, लेकिन भाजपा से कहा कि वह सरकार बनाने के दावे के साथ राज्यपाल को दिए गए पत्र को पेश करें। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि येदियुरप्पा का कुर्सी पर बने रहना उसके फैसले पर निर्भर करेगा। इसके बाद सुनवाई शुक्रवार सुबह दस बजे के लिए टाल दी गई।
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ऐसे में बीजेपी की पहुंच से अपने विधायकों को दूर करने के लिए कांग्रेस-जेडीएस भी पूरी तरह तैयार हैं। यही वजह है कि दोनों पार्टियों ने अपने विधायकों को आखिरकार हैदराबाद ले जाने का फैसला किया और गुरुवार देर रात उन्हें वहां शिफ्ट कर दिया है। सूत्रों की मानें तो कांग्रेस विधायक हैदराबाद के लिए निकले हैं। लेकिन अभी भी दो कांग्रेस विधायक राजशेखर पाटिल, प्रताप गौड़ पाटिल पार्टी के संपर्क में नहीं हैं। हालांकि, कांग्रेस नेताओं ने दावा किया है कि मैसूर क्षेत्र के कुछ बीजेपी विधायक उनके संपर्क में हैं।

एक तरफ कांग्रेस विधायकों ने रिजॉर्ट छोड़ा तो वहीं जेडीएस विधायकों ने अपना होटल भी छोड़ दिया है। बताया जा रहा है कि कुछ विधायक कोच्चि जा सकते हैं तो कुछ विधायक हैदराबाद भी जा सकते हैं।
 

 




 
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बहुमत का गणित

कर्नाटक की 224 सदस्यीय विधानसभा की 222 सीटों के लिए हुए चुनाव में भाजपा को 104 सीटें मिली हैं, जबकि बहुमत साबित करने के लिए उसे 112 सदस्यों की दरकार है यानी उसे आठ वोटों का टोटा है।

- जादुई संख्या हासिल करने के लिए मुख्यमंत्री येदियुरप्पा ने एंग्लो इंडियन समुदाय से एक सदस्य का मनोनयन करने का फैसला किया, जिसके खिलाफ कांग्रेस-जदएस सुप्रीम कोर्ट चले गए।
- आनंद सिंह समेत कांग्रेस के तीन विधायकों का अता-पता नहीं है। जबकि रिजॉर्ट में रह रहे उसके एक विधायक की तबियत खराब होने के कारण उन्हें अस्पताल पहुंचाना पड़ा। जदएस के भी दो विधायक गायब हैं। इन सभी पर भाजपा की नजर रहेगी।
- इसके अलावा भाजपा की रणनीति कांग्रेस और जदएस के लिंगायत विधायकों को विश्वास मत हासिल करने के दिन सदन की कार्यवाही से दूर रहने के लिए मना लिया जाए। इससे बहुमत का आंकड़ा घट जाएगा।

विरोध में धरने पर बैठे कांग्रेस और जदएस

राज्यपाल के फैसले के विरोध में कांग्रेस और जदएस के विधायकों ने बंगलूरू में विधानसभा के बाहर महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने धरना दिया। इसमें कांग्रेस के पूर्व सीएम सिद्धारमैया, वरिष्ठ कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद, मल्लिकार्जुन खड़गे के अलावा पूर्व पीएम एचडी देवगौड़ा भी शामिल हुए। सिद्धारमैया ने कहा कि प्रधानमंत्री अपने पद का दुरुपयोग कर रहे हैं। राज्यपाल का फैसला अलोकतांत्रिक एवं असंवैधानिक है। कुमारस्वामी ने कहा कि पैसे का लालच देने के बाद विधायकों को तोड़ने के लिए ईडी सहित केंद्रीय एजेंसियों का डर दिखाया जा रहा है।

सुबह भाजपा में दोपहर तक कांग्रेस के साथ

निर्दलीय विधायक एस शंकर को भाजपा खेमे में माना जा रहा था, लेकिन बृहस्पतिवार को सुबह राज्यपाल के खिलाफ धरने में वह विपक्षी दलों के साथ बैठे दिखाई दिए। 
 
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