उच्च न्यायालय ने एक सितंबर को पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा के पोते के निर्वाचन को अमान्य घोषित कर दिया था और दो चुनाव याचिकाओं को आंशिक रूप से स्वीकार कर लिया था, जिनमें 2019 के लोकसभा चुनाव में उनके निर्वाचन को चुनावी कदाचार के आधार पर चुनौती दी गई थी। प्रज्वल रेवन्ना ने एक सितंबर के फैसले पर रोक लगाने की मांग की है ताकि वह अपील के साथ उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकें।
प्रज्वल रेवन्ना पर आरोप था कि उन्होंने अपने स्वामित्व वाली संपत्तियों के वास्तविक मूल्य को छिपाकर अपने द्वारा दायर चुनावी हलफनामे में चुनाव आयोग को गलत जानकारी प्रदान की थी। पराजित उम्मीदवार ए मंजू और वकील देवराजगौड़ा ने दो अलग-अलग याचिकाओं में उनके निर्वाचन को चुनौती दी थी।