कर्नाटक हाईकोर्ट ने शुक्रवार को एक जनहित याचिका खारिज कर दी जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को यह निर्देश देने की मांग की गई थी कि वह टुमकुरु जिसे में सिद्धगंगा मठ के दिवंगत शिवकुमार स्वामी को भारत रत्न से सम्मानित करें। मुख्य न्यायाधीश ऋतुराज अवस्थी और न्यायाधीश एसआर कृष्ण कुमार की खंड पीठ ने रेहान खान नामक व्यक्ति की ओर से दाखिल इस याचिका को खारिज कर दिया।
पीठ ने कहा कि इस तरह का निर्देश केवल उसी स्थिति में दिया जा सकता है जब याचिकाकर्ता ऐसे अधिकारों का लाभ उठा रहा हो। लेकिन, इस मामले में ऐसा नहीं है। हाईकोर्ट ने कहा कि भारत रत्न और अन्य राष्ट्रीय नागरिक अवार्ड से सम्मानित करने की शक्ति केंद्र सरकार के पास है। किसी व्यक्ति के पास ऐसी शक्ति नहीं है इसलिए याचिकाकर्ता को ऐसे निर्देश देने की मांग करने का कोई अधिकार नहीं है।
याचिकाकर्ता के वकील मोहम्मद ताहिर ने दलील दी कि केंद्र सरकार ने साल 1954 में भारत रत्न की शुरुआत कला, विज्ञान और सार्वजनिक सेवा के क्षेत्र में असाधारण योगदानों को सम्मानित करने के लिए की थी। शिक्षा के क्षेत्र में शिवकुमार स्वामी के योगदानों को देखते हुए याचिकाकर्ता ने 12 अक्तूबर 2021 को प्रधानमंत्री को पत्र लिखा था और उन्हें यह सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार दिए जाने की मांग उठाई थी।
मुख्य न्यायधीश ने मोहम्मद ताहिर से पूछा कि क्या आप उस याचिका के बारे में नहीं जानते हैं जिसमें उद्योगपति रतन टाटा को भारत रत्न देने की मांग की गई थी। बता दें कि इस याचिका को दिल्ली हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया था। हालांकि, हाईकोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर सकते थे जो बेंगलुरु में ही थे और उन्हें इस संबंध में अपने अनुरोध के बारे में बता सकते थे।
संयोग से यह याचिका उसी दिन खारिज की गई है जब शिवकुमार स्वामी क 115वीं जयंती मनाई गई।