निचले कैडर के अधिकारी को उच्च पद पर नियुक्त करने के मामले पर कर्नाटक हाईकोर्ट ने कहा कि भले ही मुख्यमंत्री ने हस्ताक्षर किए हो, लेकिन ऐसे आदेशों को वैध तब तक नहीं मान सकते जब तक तर्क न दिया गया हो।
निचले कैडर के अधिकारी को उच्च पद पर नियुक्त करने पर कर्नाटक हाईकोर्ट में सुनवाई की गई। जस्टिस के. सोमशेखर और जस्टिस राजेश राय की पीठ ने कर्नाटक प्रशासनिक सेवा (सीनियर स्केल) अधिकारी डॉ. प्रजना अम्मेम्बाला द्वारा दायर याचिका पर फैसला सुनाया। इस दौरान कोर्ट ने सख्त लहजे में कहा कि बिना कारण के निचले कैडर के अधिकारी को उच्च पद पर नियुक्त करने के लिए मुख्यमंत्री के हस्ताक्षर पर्याप्त नहीं है।
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कोर्ट ने कहा कि स्थानांतरण आदेश पर भले ही मुख्यमंत्री ने हस्ताक्षर किए हो, लेकिन ऐसे आदेशों को वैध तब तक नहीं मान सकते जब तक तर्क न दिया गया हो। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सवाल किया कि निचले कैडर के अधिकारी को उच्च पद पर तैनात क्यों किया गया है।
बता दें 2023 के अगस्त माह में अम्मेम्बाला ने कर्नाटक राज्य प्रशासनिक न्यायाधिकरण के आदेश को चुनौती दी थी। जुलाई, 2023 की स्थानांतरण अधिसूचना को रद्द कर दिया गया था, जिसके द्वारा अम्मेम्बाला को स्थानांतरित कर दिया गया था। खाद्य और नागरिक आपूर्ति विभाग के अतिरिक्त निदेशक पथराजू वी द्वारा दायर एक आवेदन को अनुमति दी गई थी। पथराजू ने याचिका में दलील दी थी कि अम्मेम्बाला इस पद के लिए योग्य नहीं है।
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कौन है अम्मेम्बाला
2006 में सीधी नियुक्ति के जरिए अम्मेम्बाला को एक तहसीलदार के रूप में नियुक्त किया गया था। 2015 में केएएस (जूनियर स्केल) और जनवरी 2021 में केएएस (सीनियर स्केल) में पदोन्नत किया गया था। अम्मेम्बाला को जुलाई 2023 में खाद्य और नागरिक आपूर्ति विभाग के अतिरिक्त निदेशक के रूप में स्थानांतरित किया गया था।
पथराजू ने दी तबादले को चुनौती
लेकिन पथराजू पहले से ही इस पद पर थे। उन्होंने अम्मेम्बाला के तबादले को ट्रिब्यूनल में चुनौती दी। अपनी याचिका में उन्होंने कहा था कि अम्मेम्बाला को मुख्यमंत्री की पूर्व मंजूरी के बिन् इस पद पर स्थानांतरित कर दिया गया था। लेकिन राज्य ने तर्क दिया कि सीएम की पूर्व मंजूरी ली गई थी।