सुप्रीम कोर्ट ने आंध्र प्रदेश के फाइबर नेट मामले में अगली सुनवाई 12 दिसंबर को तय की है। आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने इस मामले में अग्रिम जमानत याचिका दाखिल की थी। अदालत ने इस मामले पर 12 दिसंबर को विचार करने की बात कही। एक अन्य मामला महाराष्ट्र से जुड़ा है। एल्गार परिषद केस में देश की सबसे बड़ी अदालत ने दलीलों को सुनने के बाद अगली सुनवाई छह दिसंबर को तय की। एल्गार परिषद मामले में आरोपी ने मेडिकल आधार पर जमानत की अपील की थी, जिसका राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने पुरजोर विरोध किया।
दो जजों की पीठ में हुई पूर्व सीएम के मामले की सुनवाई
तेलुगु देशम पार्टी (TDP) सुप्रीमो और आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री ने सुप्रीम कोर्ट से अग्रिम जमानत की गुहार लगाई थी। हालांकि, शीर्ष अदालत में जस्टिस अनिरुद्ध बोस और जस्टिस बेला एम त्रिवेदी की खंडपीठ में सुनवाई हुई। अदालत ने कहा कि नायडू के खिलाफ एक अन्य मामले में अदालत का फैसला आने वाला है। इसके बाद फाइबर नेट मुकदमे में सुनवाई होगी। नायडू ने अदालत से 371 करोड़ रुपये के कौशल घोटाला मामले में धारा 371 के तहत दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने की गुहार लगाई है। इस पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने वाला है।
कौशल विकास घोटाला मामले में अदालत का फैसला
फाइबर नेट मामले में नायडू की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ लूथरा ने पैरवी की। उन्होंने कहा कि नायडू की गिरफ्तारी के संबंध में आंध्र प्रदेश पुलिस की दलीलें जारी रहनी चाहिए। आंध्र प्रदेश सरकार की तरफ से भारत के पूर्व अटॉर्नी जनरल और वरीष्ठ वकील- मुकुल रोहतगी पेश हुए। उन्होंने अदालत को भरोसा दिलाया कि सुनवाई के लिए किया गया बंदोबस्त जारी रहेगा। शीर्ष अदालत ने इससे पहले साफ किया था कि आंध्र प्रदेश पुलिस फाइबर नेट मामले में पूर्व सीएम नायडू को तब तक गिरफ्तार नहीं करेगी, जब तक कौशल विकास मामले में अदालत का फैसला नहीं आ जाता।
एल्गार परिषद मामले में अदालत का निर्देश
दिन का एक और बड़ा मामला एल्गार परिषद का है। इस मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने गुरुवार को एल्गार परिषद-माओवादी संबंध मामले की आरोपी शोमा कांति सेन की अपील का विरोध किया। स्वास्थ्य आधार पर अंतरिम जमानत की मांग वाली याचिका का कड़ा विरोध करते हुए एनआईए ने अदालत से कहा कि वह सामान्य बीमारियों से पीड़ित हैं। सुप्रीम कोर्ट में न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ में इस मामले की सुनवाई हुई।
NIA के वकील ने मेडिकल बोर्ड गठित करने की बात कही
एनआईए की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज ने कहा, शोमा कांति सेन की सेहत की जांच और मेडिकल स्थिति को सत्यापित करने के लिए मेडिकल बोर्ड का गठन किया जा सकता है। उन्होंने कहा, ऐसा कुछ भी नहीं है जिसके लिए तत्काल उपचार की जरूरत हो। पीठ ने शोमा कांति सेन को चिकित्सा जमानत देने की इच्छा जाहिर की। इस पर नटराज ने कहा, मेडिकल रिपोर्ट से पता चलता है कि याचिकाकर्ता को सामान्य बीमारियां हैं। कुछ खास परेशानी नहीं है। यदि जरूरी हुआ, तो स्वास्थ्य स्थिति का पता लगाने के लिए एक मेडिकल बोर्ड का गठन किया जाएगा।
पांच साल से अधिक समय से जेल में बंद
याचिकाकर्ता शोमा कांति सेन की तरफ से वरिष्ठ वकील आनंद ग्रोवर ने पैरवी की। उन्होंने कहा कि वह पांच साल से अधिक समय से जेल में हैं और गंभीर बीमारियों से पीड़ित हैं। इस पर अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने राहत की गुहार का कड़ा विरोध किया। उन्होंने कहा कि वह जमानत से संबंधित मुख्य मामले पर बहस के लिए तैयार हैं। इसके बाद शीर्ष अदालत ने कहा कि वह इस मामले की सुनवाई छह दिसंबर को करेगी। बता दें कि शीर्ष अदालत ने इससे पहले हुई सुनवाई के दौरान स्वास्थ्य आधार पर अंतरिम जमानत की मांग करने वाले शोमा कांति सेन के आवेदन पर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) और महाराष्ट्र सरकार से जवाब मांगा था।
राज्य सरकारों को चीफ जस्टिस ने याद दिलाए कर्तव्य
एक अन्य मामले में सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकारों को उनके कर्तव्यों की याद दिलाई। अदालत ने कहा, न्यायिक अधिकारी गरिमापूर्ण ढंग से काम कर सकें, यह सुनिश्चित करना राज्य का दायित्व है। अदालत ने कहा, अधिकारियों की सेवानिवृत्ति के बाद उन्हें मानवीय गरिमा से वंचित करने के लिए सरकार बहाने नहीं बनाए जा सकते। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि विवाद समाधान की उम्मीद करने वाले नागरिकों के लिए जिला न्यायपालिका के सदस्य जुड़ाव का पहला बिंदु होते हैं। मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली तीन-न्यायाधीशों की पीठ ने कहा कि न्यायिक स्वतंत्रता आम नागरिकों का भरोसा कायम रखने के लिए बेहद जरूरी है। यह तभी तक सुनिश्चित हो सकती है जब तक न्यायाधीशों की वित्तीय गरिमा की भावना बनी रहे।
चुनाव के समय धोखाधड़ी के मामले
दिन के एक अन्य बड़े मुकदमे में चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आते हैं और अदालत राजनीतिक व्यस्तता का केंद्र बन जाती है। उन्होंने कहा कि चुनाव के समय उच्चतम न्यायालय में "धोखाधड़ी के मामलों" की संख्या बढ़ जाती है। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) की तरफ से आयोजित संविधान दिवस समारोह में सीजेआई चंद्रचूड़ ने कहा कि भारतीय संविधान हमें बताता है कि "या तो हम जीवित रहेंगे या एक साथ नष्ट हो जाएंगे।" उन्होंने कहा, जिस दिन हम संविधान का जश्न मनाते हैं, न्याय के लिए अपने कर्तव्यों का पालन करना सीखना बहुत जरूरी है। अपना अनुभव साझा करते हुए चीफ जस्टिस ने बताया, कल ही, मुझे एक धोखाधड़ी के मामले से निपटना पड़ा। सुप्रीम कोर्ट हर दिन धोखाधड़ी के मामलों से निपटता है। कुछ अदालतों में धोखाधड़ी के मामलों की संख्या काफी अधिक है। कभी-कभी चुनाव आने पर धोखाधड़ी के मामले बढ़ जाते हैं। हमें न्यायाधीशों के रूप में इसका एहसास होता है।