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Karnataka: वकीलों की संस्था में SC/ST, OBC कोटे की मांग, HC से याचिका खारिज; सुप्रीम कोर्ट जाने के दिए निर्देश

Sat, 01 Feb 2025 10:52 PM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू

सार

मामले में कर्नाटक हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति आर. देवदास ने ऑल इंडिया बैकवर्ड क्लासेज एडवोकेट्स फाउंडेशन और कर्नाटक एससी/एसटी, बैकवर्ड क्लासेज एंड माइनॉरिटीज एडवोकेट्स फेडरेशन की तरफ से दायर याचिकाओं को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि यदि याचिकाकर्ताओं को न्याय चाहिए तो वे सीधे सुप्रीम कोर्ट जा सकते हैं।
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कर्नाटक उच्च न्यायालय - फोटो : एएनआई (फाइल)
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विस्तार
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कर्नाटक हाई कोर्ट ने शनिवार को एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए बंगलूरू एडवोकेट्स एसोसिएशन (एएबी) की गवर्निंग काउंसिल में अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए आरक्षण की मांग वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया। न्यायमूर्ति आर. देवदास ने ऑल इंडिया बैकवर्ड क्लासेज एडवोकेट्स फाउंडेशन और कर्नाटक एससी/एसटी, बैकवर्ड क्लासेज एंड माइनॉरिटीज एडवोकेट्स फेडरेशन की तरफ से दायर याचिकाओं को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि यदि याचिकाकर्ताओं को न्याय चाहिए तो वे सीधे सुप्रीम कोर्ट जा सकते हैं।  
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महिलाओं के लिए आरक्षण का हवाला दिया गया
याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में अपने एक फैसले में एएबी की गवर्निंग बॉडी में 30% महिलाओं को आरक्षण देने का आदेश दिया था, इसलिए एससी-एसटी और ओबीसी वर्गों के लिए भी आरक्षण लागू होना चाहिए। हालांकि, हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत दिया गया था, जो उसे 'पूर्ण न्याय' के लिए विशेष अधिकार देता है। चूंकि एएबी के नियमों में अभी जातिगत आरक्षण का कोई प्रावधान नहीं है, इसलिए हाई कोर्ट अनुच्छेद 226 के तहत ऐसा आदेश नहीं दे सकता।  

कोर्ट ने चिंता जताई, लेकिन फैसला नहीं बदला
हालांकि हाई कोर्ट ने यह माना कि एएबी की गवर्निंग काउंसिल में अब तक किसी भी एससी/एसटी या ओबीसी सदस्य को पद नहीं मिला है, लेकिन कोर्ट ने इस मामले में दखल देने से इनकार कर दिया। याचिकाकर्ताओं ने यह भी कहा कि जब एएबी ने महिलाओं के लिए आरक्षण लागू कर दिया है, तो संविधान में दिए गए सभी आरक्षणों (जाति और लिंग आधारित) को लागू किया जाना चाहिए। लेकिन हाई कोर्ट ने यह कहते हुए कोई टिप्पणी नहीं की कि एएबी ने सुप्रीम कोर्ट का आदेश क्यों लागू किया। कोर्ट ने दोहराया कि यदि याचिकाकर्ताओं को अपने हक की मांग करनी है तो वे सीधे सुप्रीम कोर्ट का रुख करें।  
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महिलाओं के लिए सुप्रीम कोर्ट का आदेश
इससे पहले, 24 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने एएबी को यह निर्देश दिया था कि गवर्निंग काउंसिल में 30% महिलाओं को प्रतिनिधित्व दिया जाए और कोषाध्यक्ष (ट्रेजरर) का पद भी केवल महिला वकीलों के लिए आरक्षित किया जाए। यह आदेश वकीलों की संस्था में लैंगिक समानता को बढ़ावा देने के लिए दिया गया था।
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