सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार को 26 वर्षिय कवियत्री मधुमिता शुक्ला की हत्या मामले में सुनवाई की। इसके तहत अदालत ने हत्या मामले में दोषी की सजा माफ करने की याचिका पर उत्तराखंड सरकार से समयसीमा तय करने को कहा है। साथ ही राज्य धामी सरकार को चेतावनी दी है कि तय समय में देरी होने पर उसकी जमानत याचिका की जांच की जाएगी।
बता दें कि मधुमिता शुक्ला जब गर्भवती थीं तब 9 मई, 2003 को लखनऊ में उनकी हत्या कर दी गई थी। इस मामले में उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी को गिरफ्तार किया गया था। कथित तौर पर शुक्ला का अमरमणि त्रिपाठी के साथ रिश्ते थे। इसके बाद, शुक्ला की हत्या की साजिश के सिलसिले में अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार किया गया।
सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड सरकार को दिए आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड सरकार को आदेश दिया है कि वह दोषी रोहित चतुर्वेदी की सजा माफ करने पर राज्य स्तरीय समिति की सिफारिश एक सप्ताह के भीतर राज्य सरकार के सामने रखे। इसके बाद राज्य सरकार को दो सप्ताह के भीतर उचित कदम उठाने होंगे। न्यायालय ने यह भी कहा कि उत्तराखंड सरकार को अपना निर्णय केंद्र सरकार की सहमति के लिए तीन दिनों के भीतर भेजना होगा, और केंद्र सरकार एक महीने के भीतर निर्णय लेगी।
सुप्रीम कोर्ट की चेतावनी
साथ ही मामले में कोर्ट ने चेतावनी दी कि अगर इस प्रक्रिया में देरी होती है, तो 28 मार्च को मामले की अगली सुनवाई के दौरान चतुर्वेदी की अंतरिम जमानत पर विचार किया जाएगा। इसको लेकर चतुर्वेदी के वकील ने कहा कि वह 25 साल से जेल में हैं और यदि प्रक्रिया में देर होती है तो उन्हें अंतरिम जमानत मिलनी चाहिए। इस तर्क पर सर्वोच्च न्यायालय ने बिलिकिस बानों मामले का उदाहरण देते हुए यह भी कहा कि अब बिलकिस बानो मामले में लिया गया फैसला, जिसमें यह कहा गया था कि जिस राज्य में अपराध हुआ, वही राज्य दोषी की सजा माफ करने पर विचार करेगा, अब कानून में नहीं है।
सीबीआई की जांच
गौरतलब है कि केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने इस मामले की जांच की और उत्तराखंड में मुकदमा चला। जहां निचली अदालत ने त्रिपाठी, उनकी पत्नी, भतीजे रोहित चतुर्वेदी और अन्य को दोषी ठहराकर उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
उत्तर प्रदेश सरकार का तर्क
इसके साथ ही इस मामले में उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के 8 जनवरी, 2024 और 13 मई, 2022 के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि चतुर्वेदी की समयपूर्व रिहाई पर विचार करने का अधिकार उत्तराखंड सरकार का है, क्योंकि वही राज्य है जहां चतुर्वेदी के खिलाफ अपराध का मामला चला था। सुप्रीम कोर्ट ने 8 जनवरी, 2024 को यह माना था कि जिस राज्य में अपराध का मुकदमा चला है, वही राज्य दोषी की समयपूर्व रिहाई के लिए उचित प्राधिकारी होगा। इसके बाद, उत्तर प्रदेश सरकार ने 15 दिसंबर, 2023 के आदेश को वापस लेने की मांग की, जिसमें चतुर्वेदी की रिहाई पर विचार करने के लिए कहा गया था।