कर्नाटक के मंत्री कृष्णा बायरे गौड़ा ने सोमवार को बताया कि कई सालों से कई अन्य चीजों के लिए जमीन देने के बाद, अब सरकार को नए कब्रिस्तान, खेल के मैदान, अस्पताल और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं के लिए जमीन ढूंढने के लिए जूझ रही है।
कर्नाटक के राजस्व मंत्री कृष्णा बायरे गौड़ा ने दुख जताते हुए कहा कि देखिए, जो स्थिति आ गई है, कि सरकार को कब्रिस्तान के लिए जमीन खरीदनी पड़ रही है। उन्होंने बताया कि पिछले साल सरकार ने 50 करोड़ रुपये कब्रिस्तान के लिए जमीन खरीदने में खर्च किए। क्योंकि पिछले कई सालों से कई अन्य उद्देश्यों के लिए बार-बार जमीन देने के बाद, अब हमें कब्रिस्तानों के लिए जमीन खरीदने की नौबत आ गई है।
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भाजपा विधायक के सवाल पर दिया जवाब
कर्नाटक विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान हरिहर से भाजपा विधायक हरीश बी. पी. की तरफ से उठाए गए सवाल का जवाब देते हुए मंत्री कृष्णा बायरे गौड़ा ने कहा कि राज्य में बच्चों के लिए खेल के मैदान उपलब्ध कराने और बिजली घर, अस्पताल और आंगनवाड़ी बनाने के लिए भी जगह नहीं है। उन्होंने कहा, 12 हजार आंगनवाड़ी के लिए भूमि की मांग करने वाले आवेदन आए हैं, जिन्हें हम उपलब्ध नहीं करा पाए हैं। हाल ही में हुई बैठक में मुख्यमंत्री (सिद्धारमैया) ने इसके लिए मुझसे सवाल भी किए थे।
मामले में विपक्ष के उपनेता ने दी अपनी राय
मामले में मंत्री ने कहा कि सरकार के पास उपलब्ध सीमित जमीन को देने से स्थिति ऐसी हो गई है कि सार्वजनिक उपयोगिताओं, कब्रिस्तानों, स्कूलों और आंगनवाड़ियों के लिए जमीन की कमी हो गई है। वहीं इस पर विपक्ष के उपनेता अरविंद बेलाड ने कहा कि कब्रिस्तानों से संबंधित समस्या का समाधान उचित शहरी नियोजन से किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि मूल समस्या यह है कि शहरी नियोजन करते समय कब्रिस्तानों और खेल के मैदानों के लिए जमीन निर्धारित नहीं की जाती है। इस पर ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है।
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अतिक्रमित जमीन की जानकारी के लिए कार्यक्रम तैयार- गौड़ा
जबकि सरकारी भूमि की उपलब्धता के बारे में हगरीबोम्मनहल्ली जेडी(एस) विधायक नेमिराज नाइक के एक अन्य प्रश्न का उत्तर देते हुए मंत्री कृष्णा बायरे गौड़ा ने कहा कि राजस्व विभाग ने एक रजिस्ट्री तैयार कर ली है। उन्होंने आगे कहा कि हमने एक ऑनलाइन ऐप विकसित किया है। कर्नाटक में 14.5 लाख एकड़ सरकारी भूमि है। अब हमारे पास डिजिटल मानचित्रों के साथ गांव-स्तर का डेटा है। इसके अलावा मंत्री ने कहा कि 'भूमि बीट' कार्यक्रम किया जा रहा है, जिसके अनुसार गांव के लेखाकार को सरकारी भूमि पर किसी भी अतिक्रमण की पुष्टि करनी होगी और रिपोर्ट तैयार करनी होगी। मंत्री ने कहा कि अधिकारियों को कब्रिस्तानों और झीलों के अतिक्रमण को प्राथमिकता के आधार पर हटाने का निर्देश दिया गया है।