Karnataka Election: 2018 में हारते-हारते जीते थे ये पांच विधायक, कहीं दो सौ तो कहीं चार सौ वोट से बदली किस्मत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: श्वेता महतो
Updated Sat, 18 Mar 2023 05:33 PM IST
सार
पिछले विधानसभा चुनाव में जीते विधायकों में से पांच विधायकों ने 1000 से भी कम मतों के अंतर से जीत दर्ज की थी। भले ही उनके जीत का अंतर कम रहा हो लेकिन उनकी संपत्ति बाकी विधायकों से कम नहीं है।
कर्नाटक विधानसभा
- फोटो : AMAR UJALA
कर्नाटक विधानसभा चुनावों से पहले सभी पार्टियां चुनावी तैयारी में लग गई हैं। राज्य में चुनावों का एलान जल्द ही हो सकता है। मौजूदा विधानसभा की बात करें तो 2018 में 104 सीटें जीतकर भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनी थी। हालांकि, 224 सीटों वाली विधानसभा में 113 के बहुमत के आंकड़े से दूर रह गई थी। कांग्रेस को 80 तो जेडीएस को 37 सीटों पर जीत मिली थी। 2018 में कम वोटों से जीतकर आए पांच विधायकों की बात करें तो इनमें से विपक्षी पार्टी कांग्रेस के चार थे। वहीं, ऐसा एक प्रत्याशी भाजपा का भी विधानसभा पहुंचा था।
कर्नाटक विधानसभा
- फोटो : AMAR UJALA
कर्नाटक विधानसभा चुनावों से पहले सभी पार्टियां चुनावी तैयारी में लग गई हैं। राज्य में चुनावों का एलान जल्द ही हो सकता है। मौजूदा विधानसभा की बात करें तो 2018 में 104 सीटें जीतकर भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनी थी। हालांकि, 224 सीटों वाली विधानसभा में 113 के बहुमत के आंकड़े से दूर रह गई थी। कांग्रेस को 80 तो जेडीएस को 37 सीटों पर जीत मिली थी। 2018 में कम वोटों से जीतकर आए पांच विधायकों की बात करें तो इनमें से विपक्षी पार्टी कांग्रेस के चार थे। वहीं, ऐसा एक प्रत्याशी भाजपा का भी विधानसभा पहुंचा था।
पिछले विधानसभा चुनाव में जीते विधायकों में से पांच विधायकों ने 1000 से भी कम मतों के अंतर से जीत दर्ज की थी। भले ही उनके जीत का अंतर कम रहा हो लेकिन उनकी संपत्ति बाकी विधायकों से कम नहीं है। 1000 से भी कम मतों के अंतर से जीत हासिल करने वाले ये पांच विधायक कितने पढ़े-लिखे हैं और उनके पास कुल कितनी संपत्ति है, इस पर यहां एक नजर डालते हैं...
प्रतापगौड़ा पाटिल
प्रतापगौड़ा पाटिल रायचुर के मस्की के विधायक हैं। 2018 विधानसभा चुनाव में वो कांग्रेस की टिकट पर उतरे थे लेकिन 2021 में उन्होंने भाजपा का दामन थाम लिया। पाटिल, कर्नाटक यूनिवर्सिटी से बी.ए. कर चुके हैं। 2008 में जहां उनकी कुल संपत्ति 94 लाख से ज्यादा हुआ करती थी, 2018 में बढ़कर ये पांच करोड़ हो गई। चुनावी हलफनामे में उन्होंने अपनी कमाई का जरिया खेती और व्यवसाय बताया है। पिछले विधानसभा चुनाव में प्रतापगौड़ा ने भाजपा उम्मीदवार बसानागौड़ा तुरविहाल को 213 मतों के अंतर से हराया था। उन्हें चुनाव में कुल 44 प्रतिशत ही वोट शेयर मिला था।
वेंकटरमनप्पा
2018 में कांग्रेस के टिकट पर लड़े वेंकटरमनप्पा ने जेडीएस के के. एम. थिमरयप्पा को 409 वोटों के अंतर से हराया था। वेंकटरमनप्पा 2008 में बतौर निर्दलीय चुनावी मैदान में उतरे थे। कांग्रेस विधायक वेंकटरमनप्पा दसवीं पास हैं। 2008 में जहां उनकी कुल संपत्ति 61 लाख की थी, तो 2018 में बढ़कर एक करोड़ से भी अधिक हो गई। उन्होंने अपने कमाई का जरिया खेती और सामाजिक कार्य को बताया है। उनके पास कुल चल संपत्ति 45 लाख से भी अधिक और अचल संपत्ति एक करोड़ तीस लाख के करीब है।
बसावनागौड़ा पाटिल
2018 विधानसभा चुनाव में बसावनगौड़ा पाटिल कांग्रेस के टिकट पर हवेरी के हिरेकरुर सीट से जीते थे। इस चुनाव में उन्होंने भाजपा के उज्जनेश्वर बनकर को 555 वोटों के अंतर से हराया था। हालांकि, 2019 में वह भाजपा के साथ आ गए। बसावनागौड़ा ग्रेजुएट हैं और 2013 में उनकी कुल संपत्ति पांच करोड़ रुपये थी और 2018 में भी उन्होंने अपनी कुल संपत्ति पांच करोड़ ही बताया है। बता दें, राजनीति में कदम रखने से पहले बसावनागौड़ा पाटिल अभिनेता भी रह चुके हैं।
चन्नबसप्पा सथयप्पा शिवल्ली
पिछले चुनाव में कांग्रेस के चन्नबसप्पा सथयप्पा शिवल्ली ने धाड़वड की कुंडगोल सीट से जीत हासिल की थी। उन्होंने भाजपा के चिक्कनगौड़ा सिद्दानागौड़ा इश्वरगौड़ को 634 वोटों के अंतर से हराया था। शिवल्ली ने केवल 12 वीं तक ही पढ़ाई की है। 2008 तक उनकी कुल संपत्ति 54 लाख थी लेकिन 2018 में यह बढ़कर तीन करोड़ से भी अधिक हो गई। इसमें दो करोड़ से अधिक चल और एक करोड़ से अधिक अचल संपत्ति है।
गुट्टेदार सुभाष रुकमय्या
भाजपा के गुट्टेदार सुभाष रुकमय्या गुलबर्गा जिले के अलेंड सीट से विधायक हैं। उन्होंने विधानसभा चुनाव 2018 में कांग्रेस के बी.आर. पाटिल को 697 वोटों के अंतर से हराया था। सुभाष रुपमय्या केवल दसवीं पास हैं। उनकी संपत्ति की बात करें तो 2013 में यह चार करोड़ से अधिक थी। 2018 में यह बढ़कर छह करोड़ से भी अधिक हो गई थी। इसमें कुल 59 लाख की चल और तीन करोड़ से अधिक की अचल संपत्ति है। चुनावी हलफनामें में उन्होंने अपनी कमाई का जरिया खेती बताया है।