कर्नाटक में धर्मस्थल मामले को लेकर राजनीति तेज हो गई है। भाजपा ने शनिवार को राज्य की कांग्रेस सरकार से मांग की कि जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को सौंपी जाए, ताकि उन साजिशकर्ताओं और विदेशी ताकतों का पर्दाफाश हो सके, जो इस पूरे विवाद के पीछे बताए जा रहे हैं। भाजपा का आरोप है कि यह सिर्फ एक व्यक्ति की शिकायत नहीं, बल्कि एक बड़ी साजिश है, जिसका मकसद धर्मस्थल मंदिर और हिंदू भावनाओं को निशाना बनाना है।
भाजपा नेताओं ने कहा कि धर्मस्थल पर कई हत्याएं, दुष्कर्म और शवों को दफनाने की शिकायत करने वाले व्यक्ति सीएन चिन्नैया की गिरफ्तारी मात्र से सच सामने नहीं आएगा। असली सवाल यह है कि उसके पीछे कौन ताकतें हैं। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आर अशोक ने कहा कि शिकायतकर्ता हमारे लिए महत्वपूर्ण नहीं है, उसके पीछे जो साजिशकर्ता हैं, वे महत्वपूर्ण हैं।
एनआईए को सौंपी जाए जांच
आगे उन्होंने कहा कि सरकार को साबित करना होगा कि वह निष्पक्ष जांच कर रही है और हिंदुओं का अपमान नहीं कर रही है। इसके लिए अलग एसआईटी बनाना होगा या फिर केस एनआईए को देना होगा। भाजपा अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र ने भी कहा कि धर्मस्थल को बदनाम करने की एक गहरी साजिश रची गई है, जिसके पीछे विदेशी ताकतों की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
जांच और खुदाई का सिलसिला
राज्य सरकार ने इस मामले में एसआईटी का गठन किया है, जो पिछले दो दशकों में धर्मस्थल में कथित हत्याओं, दुष्कर्मों और शवों को दफनाने की शिकायतों की जांच कर रही है। शिकायतकर्ता चिन्नैया, जो पहले धर्मस्थल में सफाई कर्मचारी रह चुका है, का दावा है कि 1995 से 2014 के बीच उसे कई शव दफनाने के लिए मजबूर किया गया।
उसका आरोप है कि कई शवों पर यौन शोषण के निशान भी थे। उसने मजिस्ट्रेट के सामने भी बयान दर्ज कराया है। जांच के हिस्से के रूप में एसआईटी ने नेत्रावती नदी के किनारे जंगलों में खुदाई कराई, जहां शिकायतकर्ता ने जगहें बताई थीं। अब तक दो जगहों से हड्डियां और अवशेष मिले हैं।
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गृह मंत्री का बयान और एसआईटी की कार्यवाही
राज्य के गृह मंत्री जी परमेश्वर ने पुष्टि की कि चिन्नैया को गिरफ्तार किया गया है और वह पुलिस हिरासत में है। उन्होंने साफ कहा कि जांच पूरी होने तक किसी नतीजे पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। परमेश्वर ने कहा कि एसआईटी जांच कर रही है। उसके बयान के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी। अभी यह कहना गलत होगा कि इसके पीछे कोई नेटवर्क है या नहीं।
मंत्री ने बताया कि एसआईटी ने 'नार्को टेस्ट' की संभावना पर भी विचार किया है, लेकिन जांच पद्धति का फैसला पूरी तरह एसआईटी प्रमुख पर निर्भर है। उन्होंने कहा कि भाजपा लगातार आरोप लगाती है, लेकिन अंतिम रिपोर्ट आने तक कोई निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
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विवादित बयान और दूसरी शिकायत
इस पूरे विवाद में एक और मोड़ तब आया जब सुजाता भट नामक महिला ने दावा किया कि 2003 में उनकी बेटी अनन्या भट धर्मस्थल यात्रा के दौरान लापता हुई थी। बाद में उन्होंने बयान बदलते हुए कहा कि उनकी कोई बेटी नहीं थी और शिकायत किसी और के कहने पर दर्ज कराई गई थी। बाद में उन्होंने उस बयान को भी वापस ले लिया।
भाजपा ने इस विरोधाभासी गवाही को भी साजिश का हिस्सा बताया है और सरकार पर आरोप लगाया है कि वह असली चेहरों को बचा रही है। वहीं, गृह मंत्री परमेश्वर ने कहा कि सुजाता भट की शिकायत भी जांच के दायरे में है और रिपोर्ट आने से पहले कोई जानकारी सार्वजनिक नहीं की जाएगी।