पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा
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कर्नाटक भाजपा में कलह सतह पर आ गई है। दरअसल बगावत के आरोप में भाजपा ने अपनी पार्टी के विधायक बासनगौड़ा पाटिल यतनाल को निर्वासित कर दिया है। अब निष्कासित विधायक ने सोशल मीडिया पर एक लंबा चौड़ा पोस्ट साझा किया है और उसमें पार्टी नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगाए हैं। निष्कासित विधायक ने आरोप लगाया कि भाजपा एक समय कार्यकर्ताओं की पार्टी मानी जाती थी, लेकिन अब इसमें वंशवादी राजनीति हावी है।
बीएस येदियुरप्पा के खिलाफ खोला था मोर्चा
गौरतलब है कि कर्नाटक भाजपा ने अपने बागी विधायक बासनगौड़ा पाटिल यतनाल को छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया है। यतनाल ने पूर्व सीएम बीएस येदियुरप्पा और उनके बेटे और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वी वाई विजयेंद्र के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए हाल ही में लिंगायत नेताओं और संतों को एकजुट करने की मुहिम चलाई थी। इसके लिए भाजपा की केंद्रीय अनुशासन समिति ने यतनाल को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। अब जवाब से असंतुष्ट रहने के बाद यतनाल को पार्टी से छह साल के लिए निष्कासित कर दिया गया है।
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यतनाल ने खोला पार्टी के खिलाफ मोर्चा
अब यतनाल ने सोशल मीडिया पर लंबा चौड़ा पोस्ट लिखकर पार्टी के फैसले से नाराजगी जताई है। यतनाल ने पोस्ट में लिखा कि 'लोकसभा चुनाव में पार्टी के खराब प्रदर्शन की वजह पार्टी की आंतरिक कलह और कलबुर्गी, रायचूर, बेल्लारी और चिक्कोडी जैसे अहम क्षेत्रों में हार की समीक्षा ने कर पाने में पार्टी नेतृत्व की विफलता है। कभी कार्यकर्ताओं की पार्टी के रूप में जानी जाने वाली भाजपा की अब वंशवादी राजनीति में लिप्त होने के लिए आलोचना की जाती है। मुखर विधायकों को निष्कासित करना और इसके समर्पित कार्यकर्ताओं के योगदान की अनदेखी करना पार्टी के दोहरे मापदंडों को दर्शाता है।'
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'पार्टी नेतृत्व जमीनी हकीकत से कटा'
बासनगौड़ा पाटिल यतनाल ने लिखा कि 'दिग्गज नेताओं और निस्वार्थ कार्यकर्ताओं ने बिना आर्थिक मदद के लिए इस पार्टी को बनाया, लेकिन उनके योगदान को समायोजन की राजनीति में दबा दिया गया। हिंदुत्व के कट्टर समर्थक ईश्वरप्पा को वंशवाद का विरोध करने पर पार्टी से निकाला गया और अन्य लोगों को राजनीतिक पक्षपात का लाभ मिला।' बासनगौड़ा ने लिखा कि 'भाजपा ने ऐतिहासिक रूप से भ्रष्टाचार और भेदभाव के खिलाफ विरोध किया है, लेकिन अब इसका नेतृत्व जमीनी हकीकत से कट चुका है। अगर पारिवारिक राजनीति और अवसरवादी राजनीति जारी रहेगी तो इससे पार्टी के पतन का खतरा है। सच्चे नेतृत्व को व्यक्तिगत लाभ से अधिक राष्ट्र और लोगों को प्राथमिकता देनी चाहिए, और पार्टी के असल कार्यकर्ताओं को नेतृत्व करने का मौका दिया जाना चाहिए।'
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