हैदराबाद में छात्रों से बात नहीं कर पाएंगे जेएनयू छात्रसंघ के अध्यक्ष कन्हैया
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जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ के अध्यक्ष कन्हैया कुमार पर पहली बार रोक लगाई गई है। वे हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी के छात्रों को संबोधित नहीं कर पाएंगे। हैदराबाद यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर प्रोफेसर अप्पा राव पोदाइल ने बीबीसी हिंदी को बताया कि हम सिर्फ कन्हैया कुमार की ही बात नहीं कर रहे हैं। कार्यकारी परिषद ने यह फैसला किया है कि चूंकि विश्वविद्यालय में हालात तनावपूर्ण हैं, इसलिए किसी भी बाहरी व्यक्ति को कैंपस में दाखिल होने की इजाजत नहीं दी जाएगी।
प्रो. अप्पा राव ने कहा कि अगर कैंपस में हमारे छात्र इकट्ठे होकर मीटिंग करना चाहते हैं, तो इसमें हमें कोई आपत्ति नहीं है। चूंकि यूनिवर्सिटी के अंदर अशांत हालात हैं, इसलिए हम नहीं चाहते कि कोई बाहरी व्यक्ति अंदर दाखिल हो। उपकुलपति की अध्यक्षता में कार्यकारी परिषद ने मंगलवार को यह फैसला लिया था। कल कुछ छात्रों ने प्रो. अप्पा राव की छुट्टी से वापसी का विरोध करते हुए उपकुलपति निवास और कार्यालय में तोड़फोड़ की थी।
दलित छात्र रोहित वेमुला की आत्महत्या के बाद छात्रों के जबरदस्त विरोध के चलते 24 जनवरी को प्रो. अप्पा राव छुट्टी पर चले गए थे। हैदराबाद यूनिवर्सिटी छात्र संघ अध्यक्ष जुहैल केपी ने कहा कि हम अब भी उम्मीद में हैं कि वह (कन्हैया) छात्रों को संबोधित करेंगे। लेकिन अगर उन्हें प्रवेश की इजाजत नहीं दी जाती, तो हम छात्रों से यह नहीं कह सकते कि वो कन्हैया को सुनने के लिए कैंपस के बाहर जाएं। फिलहाल हमारी प्राथमिकता उन छात्र नेताओं को पुलिस हिरासत से छुड़ाना है। जिन्हें मंगलवार को पकड़ा गया था।
कन्हैया कुमार के हैदराबाद पहुंचने के कुछ देर बाद ही यह सूचना यूनिवर्सिटी वेबसाइट पर लगा दी गई थी। कन्हैया कुमार ने अपने पक्ष में इतना ही कहा कि वह सिर्फ हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी के छात्रों की मीटिंग में हिस्सा लेने आए थे। जेल से जमानत पर छूटने के बाद यह पहली ऐसी बैठक होगी, जिसे कन्हैया संबोधित नहीं कर पाएंगे। वेमुला और चार अन्य छात्रों को हॉस्टल से निलंबित कर दिया गया था, जिन्होंने पुलिस में प्रो. अप्पा राव के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने की शिकायत दर्ज कराई थी। रोहित की आत्महत्या पर विवाद के बाद कई राजनीतिक नेता हैदराबाद यूनिवर्सिटी कैंपस गए थे और उन्होंने छात्रों को संबोधित भी किया। इनमें कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और कम्यूनिस्ट पार्टी नेता सीताराम येचुरी शामिल थे।