कंगना रनौत-उद्धव ठाकरे (फाइल फोटो)
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महाराष्ट्र की महाविकास आघाड़ी सरकार में शामिल कांग्रेस के सामने अजीबोगरीब स्थिति पैदा हो गई है। अभिनेत्री कंगना रणौत से शिवसेना के विवाद के बीच पूर्व नौसेना अधिकारी की पिटाई से प्रदेश कांग्रेस के नेता असहज हैं। लेकिन गठबंधन की मजबूरी में कुछ बोल नहीं पा रहे हैं। अंदरखाने यह सुगबुगाहट शुरू हो गई है कि कहीं, यह मामला महाराष्ट्र में कांग्रेस की लुटिया न डुबो दे।
उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में सरकार बनाने के बाद से ही कांग्रेस की तुलना में एनसीपी को ज्यादा महत्व मिल रहा है। ठाकरे और एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार कई बार बंद कमरे में कोई निर्णय ले लेते हैं जिसकी कांग्रेस मंत्रियों तक को खबर नहीं होती। कांग्रेस के मंत्री इस पर अपना विरोध भी व्यक्त कर चुके हैं। इन सब के बीच हाल के दिनों में उद्धव सरकार की कार्यपद्धति में भी काफी बदलाव आया है।
कंगना का ऑफिस तोड़ने और पूर्व नौसेना अधिकारी मदन शर्मा की पिटाई के मामले में कांग्रेस बैकफुट पर है। कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता व पूर्व मंत्री कहते हैं कि मुख्यमंत्री कांग्रेस के मंत्रियों से जल्दी बात नहीं करते, उनका फोन भी नहीं उठाते। जबकि मौजूदा परिस्थिति में सरकार को संकट से उबारने में कांग्रेस के अनुभवी मंत्री काफी सहयोग दे सकते हैं। इसलिए कांग्रेस सत्ता में रहकर भी कुछ नहीं कर पा रही है।
बाबरी मस्जिद तोड़ने वाले बयान से खफा हैं नेता
शिवसेना प्रवक्ता संजय राउत के बाबरी मस्जिद तोड़ने वाले बयान से भी कांग्रेस के नेता खफा हैं। कंगना ने ऑफिस तोड़े जाने पर ट्वीट कर शिवसेना को बाबर सेना कहा था। इसके बाद संजय राउत ने कहा था कि शिवसेना को बाबर सेना कहने वाले जान लें कि हम वही लोग हैं जिन्होंने बाबरी मस्जिद तोड़ी थी।
निधि को लेकर भी कांग्रेस के साथ भेदभाव
सरकार में कांग्रेस को तीसरे दर्जे की वरीयता प्राप्त है। इसलिए विभागीय निधि को लेकर भेदभाव की बातें सामने आई हैं। हाल ही में राज्य विधानमंडल का दो दिवसीय मानसून सत्र आहूत किया गया था। सत्र में 29 हजार 84 करोड़ की पूरक मांग मंजूर की गई। लेकिन पूरक मांगों में शिवसेना और एनसीपी के मंत्रियों वाले विभागों पर खास मेहरबानी दिखाई गई है।