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Ayodhya Ram Mandir: ढांचा बना रहता तो समाधान भी न निकलता- कल्याण सिंह

Wed, 05 Aug 2020 09:36 AM IST
Jeet Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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कल्याण सिंह - फोटो : अमर उजाला
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समय अपनी चाल चलता है और घटनाएं इतिहास बनाती हुई आगे बढ़ती चली जाती हैं। मुझे गर्व  है कि इतिहास बनाने वाली सबसे महत्वपूर्ण और महान घटना का मैं भी एक पात्र रहा। यह मेरे पुण्य थे जो रामजी ने अपने जन्मस्थान के पुनरुद्धार से जुड़े सबसे महत्वपूर्ण काम का कुछ हिस्सा मेरे हाथों से कराकर मुझे धन्य कर दिया। राम मंदिर पर बात करते हुए कल्याण सिंह ने कहा।

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अयोध्या का विवादित ढांचा यदि 6 दिसंबर, 1992 को न टूटता तो कदाचित इस विवाद का समाधान तलाशने की कोशिशें भी तेज न होतीं। मंदिर बनने का मार्ग भी न निकलता। यह कम सौभाग्य की बात नहीं है कि जब-जब भारतीय संस्कृति, श्रीराम जन्मभूमि मंदिर और अयोध्या आंदोलन का जिक्र होगा, शहीद कारसेवकों व अन्य नायकों के साथ मेरा भी नाम जरूर लिया जाएगा।


कहा जाएगा कि कल्याण सिंह के मुख्यमंत्रित्व काल में इस स्थान का विवादित ढांचा ढहाया गया था। यह सौभाग्य प्रभु राम की कृपा के बिना संभव ही नहीं है।

अब शुरू होगा राष्ट्र निर्माण का काम

यह आंदोलन सांस्कृतिक चेतना के जागरण का था। क्षुद्र राजनीतिक स्वार्थ में राष्ट्र की अस्मिता पर तुष्टीकरण के बाणों से हमला करने वालों को मुंहतोड़ जवाब देने वाला था। राम मंदिर निर्माण शुरू होने के साथ 5 अगस्त को ये काम पूरा हो गया, लेकिन रामराज्य की अवधारणा पर राष्ट्र निर्माण का कार्य होना अभी शेष है। मुझे विश्वास है कि राम मंदिर निर्माण के साथ यह कार्य भी प्रारंभ हो जाएगा। इसकी शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सबको स्वस्थ, सानंद और स्वावलंबी बनाने के लिए शुरू किए गए कामों से कर भी दी है।

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राम मंदिर की भव्यता देख मरना चाहता हूं

जो लोग मंदिर आंदोलन को सिर्फ धार्मिक मानते हैं, उन्होंने इस आंदोलन के संदेश को अभी तक नहीं समझा है या समझना नहीं चाहते। यह आंदोलन हमारी आस्था, संस्कृति और सांस्कृतिक चेतना पर वर्षों से हो रहे अन्यायपूर्ण प्रहार का परिष्कार था।

आगे कहा कि इसने कथित सेक्युलर की आड़ में तुष्टीकरण का सियासी खेल खेलने वालों को सबक व संदेश ही नहीं दिया, बल्कि हाशिए पर भी भेजने का काम किया है। राष्ट्रवाद की शक्ति का एहसास कराया है। इसके परिणाम दिखाई भी पड़ रहे हैं। मेरी इच्छा राम काज की थी, वह पूरी हुई । बस अब एक ही इच्छा है कि मेरे जीवनकाल में जल्द से जल्द भगवान राम का भव्य मंदिर बनकर तैयार हो जाए। मैं प्रभु राम के जन्मस्थान की भव्यता का दर्शन कर चैन से मरना चाहता हूं ।

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कार सेवकों पर गोली न चलाने के आदेश पर गर्व

अयोध्या (फैजाबाद) के जिला प्रशासन ने 6 दिसंबर, 1992 को मुझे सूचित किया कि अयोध्या की स्थिति विस्फोटक हो गई है। जिलाधिकारी ने केंद्रीय सुरक्षा बलों की 4 बटालियनें मांगी हैं। उसी संदेश में यह भी उल्लेख था कि आम लोगों की भीड़ बहुत है।

सुरक्षा बलों की टुकड़ियां साकेत महाविद्यालय से आगे नहीं बढ़ पा रही हैं। गोली चलाने का आदेश मांगा गया था। मैंने दृढ़ता से आदेश दिया कि किसी भी स्थिति में गोली नहीं चलानी है। मुझे इस आदेश पर गर्व है। एक रामभक्त दूसरे रामभक्तों के रक्त से अपने हाथ रंग ही नहीं सकता।

फिर जो ढांचा ढहाया गया, वह मस्जिद नहीं, एक जर्जर ढांचा था। यह बात मैं नहीं, सीबीआई के अधिकारी कह रहे हैं । उन्होंने सीबीआई कोर्ट में अपने बयान में कहा है कि संबंधित स्थान पर 1936 से कोई नमाज पढ़ने नहीं गया। जब वहां इतने दिनों नमाज ही नहीं हुई तो फिर मस्जिद थी ही कहां।

लेखक कल्याण सिंह ढांचा ध्वंस के समय यूपी के मुख्यमंत्री थे। वे एकमात्र ऐसे नेता हैं, जिन्होंने ढांचा ढहने पर माफी मांगने के बजाय न्यायालय से एक दिन की सजा कुबूल की।
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