केंद्रीय एजेंसियों की तरफ से समुद्री घटना- कल्लकदल के लिए पहली बार रेड अलर्ट जारी किया गया है। भारतीय राष्ट्रीय महासागर सूचना सेवा केंद्र ने मछुआरों को मछली पकड़ने वाले जहाजों को बंदरगाह पर मजबूती से बांधने की चेतावनी दी है। एक बयान जारी कर मौसम विभाग ने लोगों को खतरे वाले क्षेत्र से दूर रहने की अपील की है।
मौसम एजेंसियों ने केरल और दक्षिणी तमिलनाडु के तटीय इलाकों में शनिवार देर रात 2.30 बजे से रविवार रात 11.30 बजे तक समुद्र में तेज लहरें उठने की आशंका जताते हुए अलर्ट जारी किया है। इसे कल्लकदल घटना के नाम से जाना जा रहा है। भारतीय राष्ट्रीय महासागर सूचना सेवा केंद्र (आईएनसीओआईएस) के अनुसार, इस दौरान समुद्र में 0.5 से 1.5 मीटर तक ऊंची लहरें उठने के कारण उथल-पुथल मचने की आशंका है।
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समुद्री तटों से दूर रहने की भी सलाह
आईएनसीओआईएस ने मछुआरों को मछली पकड़ने वाले जहाजों को बंदरगाह पर मजबूती से बांधने की चेतावनी दी है। एक बयान जारी कर मौसम विभाग ने लोगों को खतरे वाले क्षेत्र से दूर रहने की अपील की है। बयान में कहा गया, नावों के बीच सुरक्षित दूरी बनाकर रखने से टकराव के खतरे से बचा जा सकता है। एजेंसियों ने लोगों से समुद्री तटों से दूर रहने की भी सलाह दी है।
पहली बार रेड अलर्ट के कारण चिंता अधिक
कल्लाक्कदल' के लिए रेड अलर्ट जारी कर केंद्रीय एजेंसियों ने कहा, शनिवार और रविवार को केरल के तटीय इलाकों और दक्षिण तमिलनाडु तट पर अचानक बहुत ऊंची समुद्री लहरें उठने की आशंका है। पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) भारतीय राष्ट्रीय महासागर सूचना सेवा केंद्र (INCOIS) ने पहली बार द्वारा 'कल्लाक्कडल' की घटना के लिए रेड अलर्ट जारी किया है।
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बाढ़ की चेतावनी के साथ रेड अलर्ट जारी
समुद्र में अचानक उफान आने और ऊंची लहरें उठने को लेकर जारी अलर्ट के बारे में केरल आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (केएसडीएमए) के एक अधिकारी ने कहा, एनडीएमए-आईएनसीओआईएस ने बाढ़ की चेतावनी के साथ रेड अलर्ट जारी किया है। केरल राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (केएसडीएमए) और अन्य मौसम एजेंसियों ने लोगों को अधिकारियों के निर्देशों के मुताबिक काम करने को कहा है। देश में मछुआरों के लिए मौसम की चेतावनी जारी करने वाली केंद्रीय एजेंसी INCOIS ने मछली पकड़ने वाले जहाजों की सुरक्षा के लिए बंदरगाह में पर्याप्त बंदोबस्त करने की सलाह दी है।
क्या है कल्लकदल की घटना?
कल्लकदल मूल रूप से तटीय बाढ़ की स्थिति है जो मानसून से पहले (अप्रैल-मई में) भारत के दक्षिण-पश्चिमी तटीय इलाकों में घटित होती है। 2016 में एजीयू जर्नल में प्रकाशित एक स्टडी के अनुसार, यह उत्तरी हिंद महासागर में बाढ़ की स्थिति और दक्षिणी हिंद महासागर में मौसम के स्थितियों के बीच का संबंध है। कल्लकदल शब्द का इस्तेमाल स्थानीय मछुआरे करते हैं। कल्लकदल शब्द की उत्पत्ति मलयालम के दो शब्दों कल्लन और कदल से हुई है। कल्लन का मतलब है चोर और कदल का अर्थ है समुद्र। दोनों शब्दों को मिलाकर कल्लकदल बनाया गया है, जिसका मतलब है, समुद्री लहरें जो चोर की तरह आती हैं। INCOIS के मुताबिक हिंद महासागर के दक्षिणी भाग में तेज हवाओं के कारण निश्चित समय पर लहरें उठती हैं। बिना किसी विशेष संकेत या चेतावनी के अचानक लहरें उठने के कारण इसका नाम 'कल्लाक्कदल' पड़ा।