जॉनी दादा ने 26 सितंबर को बिजनौर जिले में एक भाजपा नेता के बेटे राहुल और उनके भतीजे किसना की हत्या कर दी थी। दो लोगों की हत्या को अंजाम देने के चार दिन बाद ही उसने 30 सितंबर को एक पूर्व एयरहोस्टेस युवती की भी गोली मारकर हत्या कर दी थी।
उस लड़की की दिसंबर में किसी और से शादी होने वाली थी और जॉनी दादा को जैसे ही इसकी भनक लगी, उसने लड़की की हत्या कर दी। इसके बाद जॉनी दादा ने 11 अक्तूबर की देर रात उसने रोडवेज की बस में गोली मार कर आत्महत्या कर ली।
उत्तर पुलिस के लिए सिरदर्द बने चुके जॉनी दादा के सिर पर एक लाख का ईनाम घोषित था। ट्रिपल मर्डर की वारदात के बाद से ही पुलिस की 21 टीमें अश्विनी को दबोचने के लिए लगातार कोशिश कर रही थीं।
स्थानीय खबरों के अनुसार, 30 वर्षीय अश्विनी कुमार पुलिस से बचने की हर संभव कोशिश कर रहा था, लेकिन पुलिस की दबिश तेज होने से वह दहशत में था। 11 अक्तूबर की रात उसने पुलिस को देखते ही खुद को गोली मार ली।
इस बारे में फिल्म के निर्देशक संदीप रेड्डी वांगा से बात की गई तो उन्होंने लड़की की घरवालों का सांत्वना दी। उन्होंने एक वेबसाइट से बातचीत में बताया कि उन्हें उस लड़की और उसके घरवालों के लिए बहुत ही बुरा लगा। उन्होंने कहा कि फिल्ममेकर होने के नाते हम अपने क्राफ्ट के लिए जिम्मेदार हैं। पर साथ ही हमें इसके नतीजों पर सोच-विचार करना भी बहुत जरूरी है। 'कबीर सिंह' या फिर 'अर्जुन रेड्डी' किसी ने भी हत्या का समर्थन नहीं किया।' मेरी फिल्मों ने कभी भी किसी को जान से मारने का समर्थन नहीं किया है।