कांग्रेस ने शनिवार को अपने नेता पवन खेड़ा के साथ एकजुटता दिखाई। इसके साथ ही कहा कि गुवाहाटी उच्च न्यायालय की ओर से उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज करने के फैसले को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी जाएगी। कांग्रेस के संचार प्रभारी महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि धमकी और डराने-धमकाने की राजनीति पर न्याय की विजय होगी।
रमेश ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, 'पूरी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस अपने मीडिया और प्रचार विभाग के अध्यक्ष पवन खेड़ा के साथ एकजुटता से खड़ी है। गुवाहाटी उच्च न्यायालय के फैसले को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती देने की प्रक्रिया चल रही है।' उन्होंने यह भी कहा, 'हमें विश्वास है कि न्याय धमकी, डराने-धमकाने और उत्पीड़न की राजनीति पर विजय प्राप्त करेगा।'
गुवाहाटी उच्च न्यायालय ने क्या किया?
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इसमें कहा गया है कि बीएनएस की धारा 339 के तहत प्रथम दृष्टया मामला दर्ज करने के लिए पर्याप्त सामग्री मौजूद है, जो जाली दस्तावेजों या इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड रखने से संबंधित है, और यह भी कहा गया है कि याचिकाकर्ता पुलिस जांच से बच रहा है। अदालत ने कहा कि इस मामले में हिरासत में पूछताछ जरूरी है ताकि यह पता चल सके कि उसके सहयोगी कौन हैं, उसके लिए वे दस्तावेज किसने एकत्र किए और उन्होंने वे दस्तावेज कैसे और कहां से एकत्र किए।
कांग्रेस नेता ने तेलंगाना उच्च न्यायालय का रुख क्यों किया?
शुरू में, खेड़ा के खिलाफ मामला दर्ज होने के बाद, उन्होंने तेलंगाना उच्च न्यायालय का रुख किया, क्योंकि कांग्रेस नेता हैदराबाद के निवासी हैं। तेलंगाना उच्च न्यायालय ने उन्हें सात दिन की अग्रिम जमानत दी, लेकिन असम पुलिस ने इसके खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर कर अग्रिम जमानत पर रोक लगाने का अंतरिम आदेश प्राप्त किया और खेड़ा को गुवाहाटी उच्च न्यायालय में जाने के लिए कहा।