बीते महीने यानी जून महीने में पूरे विश्व में भीषण गर्मी को महसूस किया गया। अब यूरोपीय संघ की मौसम एजेंसी कॉपरनिकस क्लाइमेट चेंज सर्विस (सी3एस) ने सोमवार को स्पष्ट किया है कि जून महीने में गर्मी ने सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए। सी3एस ने यह भी कहा कि यह लगातार 12वां महीना है, जब वैश्विक तापमान में 1.5 डिग्री सेल्सियस की बढ़त दर्ज की गई।
सी3एस की रिपोर्ट की खास बातें
सी3एस इस रिपोर्ट में एक खास जानकारी भी दी है। वर्ष 2023 के जून महीने के बाद लगातार 12 महीनों में वैश्विक तापमान में बढ़ोतरी दर्ज की गई। तापमान में बढ़ोतरी के मामले में जून लगातार 12वां महीना था। वर्ष 2015 में पेरिस में संयुक्त राष्ट्र ने मौसम पर चर्चा की थी। इस दौरान विश्व भर के नेताओं ने वैश्विक तापमान के 1.5 डिग्री सेल्सियस से अधिक न बढ़ने पर प्रतिबद्धता जताई थी।
ग्रीन हाउस गैसों के लगातार जमाव से बड़ी परेशानी
अगर वर्ष 1850 से लेकर वर्ष 1900 तक पृथ्वी के औसत वैश्विक सतही तापमान से तुलना करें तो ये बात सामने आती है कि इसमें 1.2 डिग्री सेल्सियस वृद्धि हो चुकी है। यह ग्रीन हाउस गैस के लगातार बढ़ते जमाव की वजह से हो रहा है। आपको बता दें कि ग्रीनहाउस गैस वायुमंडल में मौजूद वे गैस हैं जो पृथ्वी की सतह का तापमान बढ़ाती हैं। यह पर्यावरण के लिए एक चेतावनी की तरह है। ग्रीन हाउस गैस में कार्बन डाई ऑक्साइड और मीथेन जैसे गैस प्रमुख हैं। इनकी वजह से सूखा पड़ना, जंगलों में आग लगना और बाढ़ आने जैसी घटनाएं घटित होती हैं।
जून 2024 में तापमान ने तोड़े सभी रिकॉर्ड
सी3एस ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि जून 2024 में तापमान ने सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए। इस दौरान सतही हवा का तापमान 16.66 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। यह तापमान वर्ष 1991 से वर्ष 2020 के बीच के औसत तापमान से .67 डिग्री सेल्सियस अधिक रहा। इसके अलावा पिछले वर्ष जून महीने के मुकाबले .14 डिग्री सेल्सियस अधिक रहा। सी3एस ने आगे बताया कि इस वर्ष जून के महीने का वैश्विक तापमान वर्ष 1850 से वर्ष 1900 के औसत वैश्विक तापमान की तुलना में 1.5 डिग्री सेल्सियस अधिक रहा। आगे बताया गया है कि यह, इस तापमान स्तर पर पहुंचने या इस सीमा को तोड़ने वाला लगातार 12वां महीना रहा।
भारत में 61.9 करोड़ लोग प्रभावित
एजेंसी ने आगे बताया कि जून के महीने में भारत में 61.9 करोड़ लोग प्रभावित हुए। इसी तरह चीन में 57.9 करोड़, इंडोनेशिया में 23.1 करोड़, नाइजीरिया में 20.6 करोड़, ब्राजील में 17.6 करोड़, बांग्लादेश में 17.1 करोड़, अमेरिका में 16.5 करोड़, यूरोप में 15.2 करोड़, मैक्सिको में 12.3 करोड़, इथियोपिया में 12.1 करोड़ और इजिप्ट में 10.3 करोड़ लोग प्रभावित हुए।