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Gujarat: 'चुनाव लड़ने के लिए जज के इस्तीफे से निष्पक्षता को लेकर बदल सकती है लोगों की धारणा', जस्टिस गवई बोले

Sun, 20 Oct 2024 08:10 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद

सार

Gujarat: सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस बीआर गवाई ने कहा कि अगर कोई जज चुनावी राजनीति में शामिल के लिए अपने पद से इस्तीफा देता है,तो इससे निष्पक्षता के प्रति जनता की धारणा प्रभावित हो सकती है।  
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जस्टिस बी आर गवई - फोटो : आधिकारिक वेबसाइट/सुप्रीम कोर्ट
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस बी.आर गवई ने न्यायिक अधिकारियों के एक वार्षिक सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि अगर कोई जज अपने पद से इस्तीफा देकर चुनावों में भाग लेता है, तो इससे उनकी निष्पक्षता के प्रति जनता की धारणा बदल सकती है। उन्होंने कहा कि न्यायिक नैतिकता औऱ अखंडता मौलिक स्तंभ हैं, जो कानूनी प्रणाली की विश्वसनीयता को बनाए रखते हैं। 

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जस्टिस गवाई ने कहा, न्यायिक नैतिकता और अखंडता ऐसे स्तंभ हैं, जो कानून प्रणाली की विश्वसनीयता को बनाए रखते हैं। उन्होंने कहा, कोर्ट के भीतर और बाहर जज का व्यवहार सर्वोच्च मानकों के अनुरूप होना चाहिए। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि अमेरिका के एक सुप्रीम कोर्ट के जज को राष्ट्रपति उम्मीदवार के खिलाफ टिप्पणी करने के लिए माफी मांगनी पड़ी थी। इसके अलावा, अगर कोई जज चुनावी राजनीति में शामिल के लिए अपने पद से इस्तीफा देता है,तो इससे निष्पक्षता के प्रति जनता की धारणा प्रभावित हो सकती है।  

उन्होंने आगे कहा कि जजों का संवेदनशील विषयों जैसे लिंग, धर्म, जाति और राजनीतिक पर बयान देना चिंता का विषय है। उन्होंने बताया कि न्यायपालिका में विश्वास की कमी लोगों को औपचारिक न्यायिक प्रणाली से बाहर न्याय की तलाश करने के लिए प्रेरित कर सकती है, जो कानून-व्यवस्था को कमजोर कर सकता है। जस्टिस गवई ने कहा कि न्याय में देरी से निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित करना मुश्किल हो जाता है और इससे न्याय प्रणाली में भरोसा कम होता है। यह न केवल निर्दोष व्यक्तियों के लिए समस्या बनती है, बल्कि जेलों में क्षमता से ज्यादा भीड़ भी बढ़ाती है। 
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उन्होंने न्यायपालिका को कार्यपालिका और विधायका से स्वतंत्र रखने की जरूरत पर भी जोर दिया। जस्टिस गवई ने कहा, न्यायपालिका की स्वयात्तता पर किसी भी प्रकार का दखल, चाहे वह राजनीतिक हो या विधायी, निष्पक्ष न्याय की अवधारणा को कमजोर करता है। इसके साथ ही उन्होंने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और लाइव स्ट्रीमिंग जैसे उपायों का भी समर्थन किया, जो न्यायपालिका की कार्यवाही को अधिक पारदर्शी औ सुलभ बनाते हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि कोर्ट की बिना कार्यवाही की शॉर्ट वीडियो क्लिप बिना संदर्भ के गलत धारणाएं पैदा कर सकती है। इसलिए इसके लिए उचित दिशा-निर्देश बनाने की जरूरत है। 

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