भारत में निर्मित कफ सीरप से अफ्रीकी और अरब देशों में बच्चों के बीमार पड़ने और मौतों के आरोप के बाद सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री ने शुक्रवार को जोर देकर कहा कि दवाओं की गुणवत्ता को लेकर सरकार सतर्क है। साथ ही दवाओं की जांच के लिए एक मजबूत प्रणाली मौजूद है। उन्होंने यह भी बताया कि खांसी की दवाइयों की गुणवत्ता पर उठाई गई चिंताओं के संबंध में कार्रवाई की गई है। पुरुषों में मुंह व फेफड़ों और महिलाओं में स्तन कैंसर के मामले अधिक सामने आ रहे हैं। इसे देखते हुए सरकार कैंसर रोगियों के लिए किफायती और सुलभ इलाज मुहैया कराने की सभी कोशिशें कर रही है।
ऐसी घटनाएं फिर न हों: नड्डा
केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने लोकसभा में कहा कि सरकार दवाओं की गुणवत्ता को लेकर सतर्क है। साथ ही सुनिश्चित करेंगे कि ऐसी घटनाएं फिर न हों। बता दें, नड्डा कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई के एक सवाल का जवाब दे रहे थे, जिसमें अफ्रीका को निर्यात किए जाने वाले कुछ खांसी के सिरप को लेकर चिंता जताई गई थी।
उन्होंने प्रश्नकाल के दौरान कहा कि दवाओं की जांच की एक मजबूत प्रणाली है। वहीं, इस बात पर भी जोर दिया कि दुनिया की सबसे प्रभावी और सस्ती दवाओं का उत्पादन भारत में होता है। मंत्री ने यह भी कहा कि कैंसर के मामले बढ़ रहे हैं। हालांकि, जरूरी दवाओं की कीमतें नियंत्रण में हैं। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि जिन देशों की वे यात्रा कर चुके हैं, उन सभी देशों में भारत की दवाओं की मांग है। उन्होंने सरकार से वैश्विक स्तर पर दवाओं का निर्यात बढ़ाने को कहा है।
सहायक अनुभाग अधिकारी के खिलाफ शिकायत मिली थी
यह पूछे जाने पर कि क्या सरकार ने छोटे दवा निर्माताओं की प्रतिष्ठा के खिलाफ औषधि विभाग की कुछ टिप्पणियों पर ध्यान दिया है, नड्डा ने कहा कि एक सहायक अनुभाग अधिकारी के खिलाफ शिकायत मिली थी कि उसने फार्मा एसोसिएशनों को एक ईमेल भेजा था, जिसमें आधिकारिक तौर पर उचित भाषा का प्रयोग नहीं किया गया था।
मंत्री ने कहा, 'भले ही यह पत्र अनौपचारिक था, फिर भी संबंधित अधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। अधिकारी ने इसके लिए माफी मांगी है। फिर भी सक्षम प्राधिकारी ने जवाब को खारिज कर दिया और दोषी अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू की।'
100 से अधिक आवेदन मिले
उन्होंने कहा कि संशोधित औषधि प्रौद्योगिकी उन्नयन योजना (पीटीयूएएस) का उद्देश्य दवा उद्योग को अपनी उत्पादन प्रक्रिया को सर्वोत्तम वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाने में मदद करना है। उन्होंने कहा कि 11 अप्रैल, 2024 से आवेदन विंडो खोले जाने के बाद से 100 से अधिक आवेदन मिले। सात आवेदनों को मंजूरी दे दी गई है और सभी सात एमएसएमई हैं। स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि देश में कैंसर के मामले बढ़ते जा रहे हैं। इस बीच सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए सभी प्रयास कर रही है कि कैंसर रोगियों के लिए सस्ता और सुलभ उपचार उपलब्ध हो।
हर साल बढ़ रही कैंसर के मरीजों की संख्या
उन्होंने आगे कहा, 'कैंसर के मामलों की संख्या बढ़ रही है और यह हर साल करीब 2.5 प्रतिशत की दर से बढ़ रही है। पुरुषों में, मौखिक और फेफड़े के कैंसर के मामले बढ़ रहे हैं, जबकि अधिक महिलाओं को स्तन कैंसर हो रहा है। हर साल 15.5 लाख से अधिक कैंसर के मामले दर्ज किए जा रहे हैं।'
केंद्रीय मंत्री ने लोकसभा में कहा, 'कैंसर की 131 आवश्यक दवाओं की सूची है, जो अनुसूची 1 में हैं, जिनकी निगरानी की जाती है और उनकी कीमत सरकार द्वारा तय की जाती है। ये आम तौर पर इस्तेमाल की जाने वाली दवाएं हैं।' उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा कीमत पर अकुंश लगाए जाने से मरीजों को कुल मिलाकर लगभग 294 करोड़ रुपये की बचत हुई। जेपी नड्डा ने आगे कहा कि 28 संयोजन इस सूची में नहीं हैं, लेकिन एनपीपीए (राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण) और सरकार ने उनके मूल्य निर्धारण को भी नियंत्रित कर लिया है। उन्होंने कहा, 'हमने कैंसर की दवाओं को सस्ता बनाने की कोशिश की है।'