भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी से मुलाकात की। यह मुलाकात आडवाणी को भारत रत्न दिए जाने की घोषणा के बाद हुई है। दोनों की नेताओं ने आडवाणी से उनके आवास पर मुलाकात की।
लालकृष्ण आडवाणी से मुलाकात के बाद नड्डा ने ट्वीट किया, 'भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता, हमारे आदर्श आदरणीय लालकृष्ण आडवाणी को 'भारत रत्न' दिए जाने के निर्णय उपरांत आज उनके आवास पर आत्मीय भेंट कर शुभकामनाएं दी। भारतीय लोकतंत्र व राजनीति को सशक्त, सूचितापूर्ण व श्रेष्ठ बनाने में आडवाणी जी का योगदान अविस्मरणीय है। राष्ट्रप्रेम व जनसेवा की प्रबल भावना का सृजन जन-जन में साकार करने के लिए किए गए उनके कार्य भाजपा के कोटिशः कार्यकर्ताओं को सदैव प्रेरणा प्रदान करते हैं।
इससे पहले भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी को भारत रत्न से नवाजने का एलान सरकार ने किया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद ट्वीट कर इसका एलान किया था। केंद्र सरकार की ओर से उन्हें सर्वोच्च नागरिक सम्मान देने काे एलान के बाद से तमाम भाजपा नेताओं ने खुशी की लहर है।
एलान के बाद 96 वर्षीय लालकृष्ण आडवाणी ने कहा था कि मैं अत्यंत विनम्रता और कृतज्ञता के साथ इस सम्मान को स्वीकार करता हूं। यह न केवल एक व्यक्ति के रूप में मेरे लिए सम्मान है, बल्कि उन आदर्शों और सिद्धांतों का सम्मान है जिनकी मैंने अपनी पूरी क्षमता से जीवनभर सेवा की है। उन्होंने कहा था कि आदर्श वाक्य 'यह जीवन मेरा नहीं है, यह मेरे राष्ट्र के लिए है' ने मुझे प्रेरित किया है। उन्होंने कहा कि आज मैं दो लोगों (पंडित दीनदयाल उपाध्याय और अटल बिहारी वाजपेयी) को कृतज्ञतापूर्वक याद करता हूं, जिनके साथ मैंने काम किया है। साथ ही उन्होंने इस सम्मान के लिए राष्ट्रपति द्रौपद्री मुर्मू, पीएम मोदी का आभार व्यक्त किया है। उन्होंने अपने परिवार के सभी सदस्यों, अपनी दिवंगत पत्नी कमला के प्रति अपनी गहरी भावनाएं व्यक्त करता हूं।
विभाजन के बाद पाकिस्तान से भारत आया था आडवाणी का परिवार
लालकृष्ण आडवाणी का जन्म पाकिस्तान के कराची में 8 नवंबर 1927 को एक हिंदू सिंधी परिवार में हुआ था। आडवाणी की शुरुआती शिक्षा कराची के सेंट पैट्रिक हाई स्कूल से हुई थी। भारत-पाकिस्तान विभाजन के बाद आडवाणी का परिवार पाकिस्तान छोड़कर भारत के मुंबई में आकर बस गया। आडवाणी विभाजन से पहले से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े थे और भारत आने के बाद वे आरएसएस के प्रचारक बन गए। आरएसएस के साथ उन्होंने राजस्थान में काम किया। साल 1957 में आडवाणी जनसंघ के लिए काम करने के लिए दिल्ली आ गए। दिल्ली में आडवाणी अटल बिहारी वाजपेयी के घर में ही रहे थे।