शुरू कर दी थी ब्राह्मणों की राजनीति
जितिन प्रसाद अपने गृह नगर में ब्राह्मण चेतना मंच बनाकर ब्राह्मणों की राजनीति को हवा दे रहे थे। वे इस संगठन से युवा ब्राह्मणों को लगातार जोड़ रहे थे और इसमें काफी सफल भी हो रहे थे। वे चाहते थे कि कांग्रेस पार्टी अगले विधानसभा चुनाव के पहले किसी ब्राह्मण को प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त करे, या किसी ब्राह्मण चेहरे को मुख्यमंत्री के रूप में प्रोजेक्ट करे। लेकिन कथित तौर पर संदीप सिंह और अजय कुमार सिंह लल्लू के कारण उनकी यह सोच जमीन पर नहीं उतर पा रही थी। लिहाजा अपनी बातों पर कोई सकारात्मक फैसला होते न देख उन्होंने कांग्रेस को छोड़ने का निर्णय कर लिया।
लेकिन भाजपा में भी नहीं कर पायेंगे ये काम
जितिन प्रसाद के ही करीबी नेता मानते हैं कि उन्होंने जिस मुहिम को लेकर कांग्रेस का साथ छोड़ दिया, वे भाजपा में जाने के बाद भी वह काम नहीं कर पायेंगे। भाजपा योगी आदित्यनाथ के रहते न तो किसी दूसरे (ब्राह्मण) को मुख्यमंत्री के तौर पर प्रोजेक्ट कर पाएगी और न ही सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी किसी ब्राह्मण को सौंप सकेगी। इस पर अभी स्वतंत्र देव सिंह का कब्ज़ा है और अगर बदलाव भी हुआ तो यह पद केशव प्रसाद मौर्य के पास ही जाने की संभावना ज्यादा है जो पिछड़े वर्ग के एक लोकप्रिय चेहरे बनकर उभर रहे हैं।
कितने उपयोगी होंगे जितिन प्रसाद
दरअसल, सच्चाई यह है कि भाजपा के पास इस समय कोई ब्राह्मण चेहरा नहीं है। कलराज मिश्रा का जमाना खत्म हो चुका है तो लक्ष्मीकांत वाजपेयी प्रदेश के बड़े नाम होने के बावजूद ब्राह्मणों के नेता के तौर पर नहीं देखे जाते। पार्टी के अंदर दिनेश शर्मा उपमुख्यमंत्री के रूप में तो ब्रजेश पाठक और अन्य मंत्रियों के रूप में मंत्रिमंडल में मौजूद हैं। लेकिन इनमें से कोई भी ब्राह्मणों का नेता नहीं कहा जा सकता है। लिहाजा भाजपा किसी ऐसे बड़े चेहरे की तलाश में है जिसे वह ब्राह्मणों के चेहरे के रूप में स्थापित कर सके। जितिन प्रसाद को इसी कोटे की भरपाई के रूप में देखा जा रहा है।
भाजपा से नाराज ब्राह्मण
कहा जा रहा है कि योगी आदित्यनाथ सरकार के कामकाज को लेकर प्रदेश के ब्राह्मण स्वयं को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं और इस चुनाव में भाजपा के खिलाफ मतदान कर सकते हैं। यही कारण है कि भाजपा अपने तमाम फैसलों के साथ ब्राह्मण मतदाताओं को साधने की कोशिश कर रही है। इसी क्रम में एक दिन पहले ही रिटायर् आईएएस अधिकारी अनूप चन्द्र पाण्डेय को निर्वाचन आयुक्त बनाने का निर्णय किया गया, तो प्रदेश के कई शीर्ष पदों पर ब्राह्मणों को जगह दी गई। जितिन प्रसाद को साथ लाने का मतलब इसी वोट बैंक को साधना है।
कांग्रेस नेता ने जताया दुःख
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं प्रियंका गांधी के सलाहकार आचार्य प्रमोद कृष्णम ने अमर उजाला से कहा कि जितिन प्रसाद एक युवा और प्रतिभाशाली नेता हैं। कांग्रेस में रहकर उन्होंने जनता के हितों की लड़ाई लड़ी और कमजोर वर्गों की आवाज उठाई। अगर वे संगठन के साथ रहते तो पार्टी के लिए ज्यादा उपयोगी साबित होते। उन्होंने कहा कि एक ऊर्जावान साथी का पार्टी से जाना दुर्भाग्यपूर्ण है।