जितिन प्रसाद, कांग्रेस के दिग्गज नेता जितेंद्र प्रसाद के बेटे हैं। जितेंद्र प्रसाद दो प्रधानमंत्रियों (राजीव गांधी और पीवी नरसिम्हाराव) के राजनीतिक सलाहकार थे। वर्ष 2000 में जितेंद्र प्रसाद कांग्रेस अध्यक्ष का चुनाव सोनिया गांधी के खिलाफ लड़े थे, लेकिन वह हार गए थे। वर्ष 2001 में जितेंद्र प्रसाद का निधन हो गया।
2004 बने सबसे युवा केंद्रीय मंत्री
इसके बाद पिता जितेंद्र प्रसाद की राजनीतिक विरासत को जितिन प्रसाद ने संभाला। वर्ष 2001 में वह इंडियन यूथ कांग्रेस से जुड़ गए। वर्ष 2004 में जितिन प्रसाद शाहजहांपुर सीट से जीतकर पहली बार लोकसभा पहुंचे। यूपीए-1 की सरकार में जितिन प्रसाद को केंद्रीय मंत्री बनाया गया। वह मंत्री बनने वाले सबसे युवा चेहरों में से एक थे।
वर्ष 2009 में जितिन प्रसाद, धौरहरा लोकसभा सीट से लड़े और जीते। यूपीए-2 में जितिन प्रसाद को पेट्रोलियम और सड़क एवं परिवहन जैसे अहम मंत्रालय की बतौर राज्य मंत्री जिम्मेदारी मिली थी। वर्ष 2014 का चुनाव जितिन प्रसाद हार गए। इसके बाद से ही जितिन प्रसाद के राजनीतिक सितारे गर्दिश में चल रहे थे।
पूर्व केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद उन 23 नेताओं में शामिल थे, जिन्होंने कांग्रेस के नेतृत्व में बदलाव और इसे और ज्यादा सजीव बनाने के लिए पत्र लिखा था। उत्तर प्रदेश में इसको लेकर कुछ नेताओं ने उनका विरोध भी किया था।
कांग्रेस ने किया था ब्रह्म चेतना सवांद कार्यक्रम से किनारा
जितिन प्रसाद लंबे समय से ब्राह्मण समाज के हक में आवाज उठाते रहे हैं। हालांकि, कांग्रेस के प्रदेश नेतृत्व से उन्हें समर्थन नहीं मिल रहा था। यही वजह थी कि जब जितिन ने ब्रह्म चेतना सवांद कार्यक्रम की घोषणा की तो पार्टी ने इससे किनारा कर लिया। कई नेताओं ने यह तक कहा कि वह उनका अपना निजी मसला है, इससे पार्टी का कोई लेना-देना नहीं है।