केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने रविवार को क्षेत्रीय भाषा में परीक्षा को लेकर बयान दिया। उन्होंने कहा, कर्मचारी चयन आयोग का उद्देश्य भविष्य में 22 भारतीय भाषाओं में प्रतियोगी परीक्षाएं करवाना है।
केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने रविवार को क्षेत्रीय भाषा में परीक्षा को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा, कर्मचारी चयन आयोग का उद्देश्य भविष्य में 22 भारतीय भाषाओं में प्रतियोगी परीक्षाएं करवाना है। उन्होंने कहा, 2014 से पहले उम्मीदवारों के पास परीक्षा के माध्यम के रूप में हिंदी या अंग्रेजी में से किसी एक को चुनने के अलावा कोई विकल्प नहीं था।
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'भारतीय भाषा उत्सव: प्रौद्योगिकी और भारतीय भाषा शिखर सम्मेलन' के समापन सत्र को संबोधित करते हुए कहा, इरादा सभी इच्छुक उम्मीदवारों को भाषा तटस्थ समान अवसर प्रदान करना है। साथ ही उन्होंने कहा, पीएम मोदी के आदेश पर एसएससी परीक्षाएं 13 भाषाओं (11 क्षेत्रीय भाषाओं और हिंदी और अंग्रेजी) में आयोजित की जा रही हैं।
स्थानीय युवाओं को मिलेगा लाभ
कार्मिक राज्य मंत्री सिंह ने कहा कि 2014 से पहले अंग्रेजी का हिंदी में अनुवाद भी बहुत खराब तरीके से किया जाता था, जिससे कई छात्रों को नुकसान होता था। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में एसएससी का लक्ष्य संविधान की आठवीं अनुसूची में उल्लिखित सभी 22 भारतीय भाषाओं में प्रतियोगी परीक्षाएं आयोजित करना है। जेईई, एनईईटी और यूजीसी परीक्षाएं 12 भारतीय भाषाओं में भी आयोजित की जा रही हैं । यह ऐतिहासिक निर्णय स्थानीय युवाओं की भागीदारी को बढ़ावा देगा।
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साथ ही उन्होंने कहा, पीएम मोदी ने हिंदी, तमिल, तेलुगु, मलयालम, गुजराती और बंगाली जैसी क्षेत्रीय भाषाओं में मेडिकल और इंजीनियरिंग शिक्षा प्रदान करने का आह्वान किया है।प्रधानमंत्री ने नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) में प्राथमिक, तकनीकी और चिकित्सा शिक्षा में छात्रों की मातृभाषा को महत्व देकर एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है।