हवाई जहाज से घरेलू उड़ान भरने वालों की जेब और ढीली हो सकती है। फ्लाइट में यात्रियों की ज्यादा सामान ले जाने की आदत से परेशान जेट एयरवेज ने नया फैसला किया है। जेट एयरवेज के नए नियम के तहत एक्सट्रा बैग ले जाने पर यात्री से 900 रुपए वसूले जाएंगे।
ये नियम 6 शहरों से उड़ान भरने वाली घरेलू फ्लाइट पर लागू होगा।
जेट एयरवेज के अधिकारियों के मुताबिक यात्री अभी 7 से 10 किलो का एक हैंडबैग ले जा सकते हैं। इसके अलावा पुरुष यात्री अपने साथ लैपटॉप बैग और महिला यात्री अपना पर्स ले जा सकती हैं।
कंपनी के अधिकारियों के मुताबिक एक्सट्रा बैग पर 900 रुपए लेने की वजह ज्यादा राजस्व कमाना नहीं है, बल्कि यात्रियों की ज्यादा सामान ले जाने की आदत के चलते मजबूरन ये कदम उठाना पड़ा। जेट एयरवेज के इस नियम को दूसरी विमानन कंपनियां भी लागू कर सकती हैं।
हाईकोर्ट डीजीसीए के जवाब पर असंतुष्ट
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इससे पहले हाईकोर्ट ने विमानन नियामक डीजीसीए द्वारा हवाई यात्रा में अतिरिक्त बैगेज पर 15 से 20 किलो के बीच वजन के लिए 100 रुपये प्रति किलोग्राम रेट तय करने के जवाब पर असंतुष्टि जताई थी। अदालत ने कहा था कि आपने यह स्पष्ट नहीं किया कि 100 रुपये कैसे तय किया गया है।
न्यायमूर्ति संजीव सचदेव ने एयरलाइंस द्वारा सरकार के निर्णय को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान कहा कि सरकार ने 100 रुपये प्रति किलो का किराया किस आधार पर तय किया। अदालत ने कहा कि आपने 75 या 150 रुपये क्यों नहीं तय किया। अदालत ने डीजीसीए और नागरिक उड्डयन मंत्रालय की और से पेश अतिरिक्त सॉलिसीटर जनरल पीएस पटवालिया से पूछा कि आपने कैसे माना कि 100 रुपये एक उचित राशि है।
पटवालिया ने कहा कि डीजीसीए महानिदेशक और विशेषज्ञ बॉडी ने सभी की सलाह लेकर यह राशि तय की है। उन्होंने कहा कि मात्र चार एयरलाइंस ने ही सरकार के निर्णय को चुनौती दी है।
19 जुलाई को होगा फैसला?
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सरकार द्वारा तय नए नियम एक जुलाई से प्रभावी हो गए हैं। इससे पूर्व एयरलाइंस कंपनियां यात्रियों को 15 किलो वजन ही फ्री देती थी जबकि एयर इंडिया 25 किलो वजन ले जाने की इजाजत देती थी। इससे ज्यादा वजन होने पर वे प्रति किलो 220 से 350 रुपये प्रति किलो वजन का वसूलती थी।
पीएस पटवालिया ने तर्क रखा कि एयरलाइंस कंपनियां अलग-अलग रेट वसूल कर मनमाना रवैया अपना रहीं हैं। उन्होंने कहा कि डीजीसीए को यात्रियों को परेशानी से बचाने और उनकी सुविधाओं के ध्यानार्थ ऐसा निर्णय लेने का अधिकार है।
इस मामले में जेट एयरवेज, स्पाइसजेट, इंडिगो और गोएयर एयरलाइंस के इंडियन एयरलाइंस महासंघ (एफआईए) ने सरकार के निर्णय को चुनौती दी है। उन्होंने कहा कि डीजीसीए को इस प्रकार का निर्णय लेने का कोई अधिकार नहीं है। ऐसे में अतिरिक्त वजन के संबंध में जारी निर्णय को खारिज किया जाए। अदालत ने इस मामले की सुनवाई अब 19 जुलाई तय की है।