जेपी इंफ्राटेक को दिवालिया होने से बचाने के लिए जेपी ग्रुप प्रमोटर आगे आए हैं। प्रमोटर मनोज गौड़ द्वारा पेश प्रस्ताव में दस हजार करोड़ रुपये की पेशकश कर बैंक लोन चुकाने और आवास परियोजनाओं को पूरा करने की योजना के तहत उधारदाताओं को कंपनी में हिस्सेदारी की योजना बताई गई है। गौड़ द्वारा पेश की गई रकम हाल ही में नीलामी प्रक्रिया के दौरान लगाई गई 7350 करोड़ की बोली से करीब 25 फीसदी ज्यादा है।
सूत्रों के अनुसार प्रस्ताव के तहत 9800 करोड़ रुपये बैंकों का कर्ज चुकाने और उधारदाताओं को कंपनी में हिस्सेदारी देने की योजना के साथ ही कंपनी के अधूरे पड़े आवासीय प्रोजेक्ट को पूरा किया जाएगा।
गौड़ ने अपने प्रस्ताव के समर्थन में कमेटी ऑफ क्रेडिटर (सीओसी) समिति के सामने एक प्रस्तुती भी दी। हालांकि अभी साफ नहीं है कि सीओसी ने गौड़ का यह प्रस्ताव स्वीकार किया है।
पैनल इस बारे में लक्षद्वीप लि. द्वारा किए गए दावों पर भी विचार करेगा जिसने की कुछ हफ्ते पहले बोली लगाते हुए 7350 करोड़ रुपये का प्रस्ताव दिया था। सूत्रों का कहना है कि मामले को लेकर अगले दो दिनों में बैठक कर बड़ा फैसला लिया जा सकता है।