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नए सिरे से जाट आंदोलन की सुगबुगाहट ने बढ़ाई पार्टी की चिंता

Tue, 31 May 2016 01:34 AM IST
हिमांशु मिश्र/ अमर उजाला, नई दिल्ली
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जाट आरक्षण मुद्दे से बीजेपी को नुकसान - फोटो : Getty
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उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पूर्व जाट आरक्षण मामले के एक बार फिर से तूल पकडने की संभावना ने भाजपा की परेशानी बढ़ा दी है। खासतौर पर हरियाणा सरकार द्वारा आरक्षण की व्यवस्था पर हाईकोर्ट की रोक और जाट बिरादरी की हरियाणा में एक बार फिर से आंदोलन की चेतावनी पार्टी चिंतित है।
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पार्टी के लिए मुश्किल यह है कि निदान के लिए आरक्षण के फैसले को संविधान की 9वीं अनुसूची में डालने की प्रक्रिया न सिर्फ बेहद लंबी है, बल्कि एक मामले में इस तरह का कदम उठाने के बाद आरक्षण की मांग कर रही अन्य जातियां भी इस तरह के फैसले के लिए गोलबंद हो जाएंगी। फिलहाल पार्टी और सरकार में जाट आरक्षण का हल निकालने के लिए माथापच्ची का दौर जारी है।

गौरतलब है कि हरियाणा में हिंसक आंदोलन के बाद राज्य सरकार ने विशेष पिछड़ा वर्ग (बीसीसी) के तहत जाट सहित कुछ अन्य जातियों के लिए आरक्षण का प्रावधान किया। हालांकि पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पिछले दिनों इस पर रोक लगा दी। इसके बाद जाट बिरादरी से जुड़े संगठन आंदोलन करने के लिए नए सिरे से गोलबंद हो रहे हैं। इनमें अखिल भारतीय जाट संघर्ष समिति ने हरियाणा में आंदोलन में शामिल रहे नेताओं के खिलाफ देशद्रोह का मुकदमा दर्ज किए जाने के विरोध के बहाने 5 जून से पूरे हरियाणा में जाट न्याय रैली का सिलसिला शुरू करने की घोषणा की है। 
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'हल निकालना आसान नहीं'

5 जून से फिर सड़कों पर उतरने की धमकी - फोटो : Getty
हरियाणा में हिंसक आंदोलन के बाद आरक्षण की संभावना तलाशने के लिए भाजपा की ओर से केंद्रीय मंत्री वैंकेया नायडू की अध्यक्षता में बनाई गई समिति के एक सदस्य ने स्वीकार किया कि हल निकालना आसान नहीं है। उक्त नेता के अनुसार इसके लिए जाट आरक्षण मामले को संविधान की 9वीं अनुसूची में डालना होगा। इसके लिए पहले राज्य की ओर से प्रस्ताव आएगा, जिस पर संसद का दोनों सदन सहमति की मुहर लगाएगा।

इसके बाद अंत में इस पर राष्ट्रपति की मंजूरी लेनी होगी। उक्त नेता के मुताबिक यह प्रक्रिया बेहद लंबी है। इसके बाद डर यह है कि एक बार इस प्रक्रिया के इस्तेमाल के बाद आरक्षण की मांग कर रही अन्य जातियां भी यही रास्ता अपनाने के लिए दबाव डालेगी। गुर्जर, पटेल सहित एक दर्जन जातियां अरसे से इसके लिए आंदोलनरत भी हैं। पार्टी की चिंता है कि आरक्षण आंदोलन की आग अगर एक बार फिर भड़की तो उसे उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में सियासी नुकसान झेलना होगा। 

हरियाणा सरकार ने वादे के अनुरूप जाट बिरादरी केलिए आरक्षण का प्रावधान किया। हाईकोर्ट ने अब इस पर रोक लगा दी है। दरअसल यूपीए सरकार की हड़बड़ी ने मामले को जटिल बना दिया। जिस प्रकार पिछड़ा वर्ग आयोग को दरकिनार कर जाटों को पिछड़ा जाति वर्ग में शामिल किया गया, उससे स्थिति बिगड़ गई। हम जल्द इस समस्या का समय रहते रास्ता निकालेंगे।
संजीव बालियान, कृषि राज्य मंत्री
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