सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को जम्मू एवं कश्मीर प्रशासन को इस बारे में निर्देश लाने के लिए कहा है कि वे पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्लाह को रिलीज करना चाहते हैं या नहीं। यह कहते हुए सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम(रासुका) के तहत डिटेन किए गए उमर अब्दुल्लाह को रिलीज करने को लेकर बहन सारा पायलट द्वारा दाखिल हैबियस कॉरपस याचिका पर सुनवाई टाल दी।
जस्टिस अरूण मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने जम्मू एवं कश्मीर प्रशासन को एक हफ्ते में उमर को रिलीज करने पर निर्णय लेने केलिए कहा है।
मालूम हो कि सारा ने पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर उमर को रिलीज करने का आदेश देने की गुहार लगाई थी। सारा का कहना था कि पिछले सात महीने से उमर को डिटेन कर रखा गया है। वहीं जम्मू एवं कश्मीर प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट में अपना जवाब दाखिल कर पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्लाह को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम(रासुका) के तहत डिटेन करने के निर्णय को सही करार करार दिया है।
प्रशासन का कहना है कि उमर अब्दुल्लाह अब भी पब्लिक ऑर्डर के लिए खतरा बने हुए हैं। उनकी पूर्व की गतिविधियां यह साबित करती हैं कि घाटी में अशांति के लिए वह किस तरह से जिम्मेदार हैं।