दिल्ली में हो रहे कौटिल्य आर्थिक सम्मेलन में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र को लेकर तंज कसा। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र को पुरानी कंपनी जैसा बताया। विदेश मंत्री ने कहा कि यह पूरी तरह से बाजार के साथ तालमेल नहीं बिठा रहा है, बल्कि जगह पर कब्जा कर रहा है। उन्होंने कि इस समय दुनिया में दो बहुत गंभीर संघर्ष चल रहे हैं, मगर संयुक्त राष्ट्र बतौर दर्शक के अलावा और कहां है?
वैश्विक परिदृश्य में संयुक्त राष्ट्र की भूमिका की उन्होंने आलोचना की। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र समय से काफी पीछे हो गया है। जब दुनिया में स्टार्ट अप और नवाचार होते हैं तो अपने तरीके से काम करना शुरू कर देते हैं। विदेश मंत्री ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र कामकाज में भले ही कितना भी खराब क्यों न हो, यह अभी भी बहुपक्षीय है। मगर जब यह प्रमुख मुद्दों पर अपने कदम उठाता तो देश अपने तरीके खोजते हैं।
विदेश मंत्री ने कहा कि पिछले पांच से दस साल में शायद हमारे जीवन में तो सबसे बड़ी चीज हुई वह कोविड थी। मगर संयुक्त राष्ट्र ने इस पर क्या किया? मुझे तो लगता है कि बहुत ज्यादा कुछ नहीं। आज दुनिया में दो गंभीर संघर्ष चल रहे हैं, उन पर संयुक्त राष्ट्र कहां है?
उन्होंने कहा कि अभी ठीक वैसा ही हो रहा है, जैसा कोविड के दौरान हुआ था। तब देशों ने अपना काम किया। देशों के एक समूह ने कोवैक्स जैसी पहल की थी। उन्होंने कहा कि अब मुद्दों पर सहमत होने के लिए देश एक साथ आ रहे हैं। उनका संयोजन बढ़ रहा है। भारत-मध्य-पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा आईएमईसी, वैश्विक हितों की देखभाल के लिए हिंद-प्रशांत में क्वाड, अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन आईएसए और आपदा प्रतिरोधी बुनियादी ढांचे के लिए बना गठबंधन सीडीआरआई इसके उदाहरण हैं। यह सभी निकाय संयुक्त राष्ट्र के ढांचे के बाहर आते हैं।
एस जयशंकर ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र जारी रहेगा, लेकिन तेजी से एक गैर-संयुक्त राष्ट्र सक्रिय स्थान ले रहा है। मुझे लगता है कि यह संयुक्त राष्ट्र के बारे में बता रहा है। बता दें कि भारत बदले हुए समय के साथ संयुक्त राष्ट्र और इसकी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की मांग करता रहा है। इसमें पांच स्थायी सदस्य रूस, ब्रिटेन, चीन, फ्रांस और अमेरिका हैं।
पाकिस्तान से बात करने नहीं जा रहा
एससीओ शिखर सम्मेलन में भाग लेने पाकिस्तान जाने के सवाल पर विदेश मंत्री ने अपने पाकिस्तानी समकक्ष से द्विपक्षीय वार्ता से इनकार करने की बात कही। जयशंकर ने कहा कि मैं वहां एक निश्चित काम एक निश्चित जिम्मेदारी के साथ करने लिए जा रहा हूं। मैं अपनी जिम्मेदारियों को गंभीरता से लेता हूं। मैं एससीओ बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए जा रहा हूं।
अमेरिका चुनाव को लेकर की बात
जयशंकर से अमेरिकी चुनाव के संभावित नतीजों को लेकर कहा कि पिछले पांच वर्षों में पीछे मुड़कर देखें, तो पता चलेगा कि 2020 में लोगों ने जिन नीतियों को ट्रंप प्रशासन की नीतियां माना था, उनमें से कितनी वास्तव में न केवल बाइडन द्वारा लागू की गईं, बल्कि उन्होंने उन नीतियों को दोगुना कर दिया। वह सिर्फ एक राजनेता और फैशन नहीं है, बल्कि एक प्रशासन है। मुझे लगता है कि बहुत गहरे बदलाव हो रहे हैं। अमेरिका ने भूराजनीतिक और अपने आर्थिक दृष्टिकोण में बदलाव किया है और इस निष्कर्ष पर पहुंचा है कि कई साल पहले तैयार की गई व्यवस्था अब उस हद तक उसके लाभ के लिए काम नहीं करती है।
ग्लोबल साउथ का विश्वसनीय सदस्य है भारत
ग्लोबल साउथ पर को लेकर जयशंकर ने कहा कि इसका अपने आप में एक महान मूल्य है। यह सामूहिक है। भारत इसका नेता बनने की उम्मीद नहीं करता है। हमें एक विश्वसनीय और स्पष्टवादी सदस्य के रूप में देखा जाता है। इसलिए हम ग्लोबल साउथ से दूर नहीं जाना चाहते। बल्कि हम इसके विपरीत देखते हैं।