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Jaishankar: कच्चातिवु को लेकर जयशंकर ने डीएमके पर साधा निशाना, बोले- वो श्रीलंका के साथ वार्ता में एक पक्ष थे

Thu, 04 Apr 2024 04:05 PM IST
आदर्श शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तिरुवनंतपुरम

सार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कच्चातिवु को लेकर दिए गए बयान के बाद से ही राजनीतिक सरगर्मियां बढ़ गई है।डीएमके पर कटाक्ष करते हुए जयशंकर ने कहा कि मुझे लगता है कि जो सबसे खास है वह यह है कि तमिलनाडु के लोगों को सच्चाई पता होनी चाहिए।
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एस जयशंकर (फाइल फोटो) - फोटो : Twitter
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विस्तार
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कच्चातिवु को लेकर दिए गए बयान के बाद से ही राजनीतिक सरगर्मियां बढ़ गई है। तमाम दलों के बीच बयानबाजी का दौरा शुरू हो गया है। इस बीच डीएमके पर कटाक्ष करते हुए विदेश मंत्री जयशंकर ने दावा किया कि तत्कालीन केंद्र सरकार के साथ डीएमके ने पांच दशक पहले बातचीत की थी, बाद में जो निर्णय लिया गया उसमें भी उन्होंने सहमति दिखाई थी। 
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कच्चातिवु को लेकर डीएमके भी शामिल थी- जयशंकर
डीएमके पर कटाक्ष करते हुए जयशंकर ने कहा कि मुझे लगता है कि जो सबसे खास है वह यह है कि तमिलनाडु के लोगों को सच्चाई पता होनी चाहिए। उन्हें पता होना चाहिए कि आखिर क्या हुआ था। कच्चातिवु द्वीप को लेकर जो भी निर्णय लिया गया, उसे पूरी तरह से गुप्त रखा गया था। विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि डीएमके पूरी तरह से इस निर्णय में शामिल थी।

वो सार्वजनिक रूप से स्वीकार नहीं करेंगे- जयशंकर 
आरटीआई के जरिए सार्वजनिक हुए दस्तावेजों का हवाला देते हुए जयशंकर ने कहा कि सब जानते है कि गुप्त रूप से जो समझौता उन्होंने किया था, वो सार्वजनिक रूप से उसे स्वीकार नहीं करेंगे। तमिलनाडु में मछुआरों की दशा के लिए डीएमके और तत्कालीन केंद्र सरकार ही जिम्मेदार है। द्वीप का मुद्दा अक्सर संसद में उठाया जाता है और केंद्र और राज्य सरकार के बीच लगातार पत्राचार का विषय रहा है। 
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जयशंकर ने पहले ही किया था दावा
इससे पहले 1 अप्रैल को जयशंकर ने दावा किया था कि कांग्रेस के प्रधानमंत्रियों ने कच्चातिवु द्वीप को लेकर उदासीनता दिखाई जैसे कि उन्हें इसकी परवाह नहीं थी और इसके विपरीत कानूनी विचारों के बावजूद उन्होंने भारतीय मछुआरों के अधिकारों को छोड़ दिया। उनका कहना था कि जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी जैसे प्रधानमंत्रियों ने समुद्री सीमा समझौते के तहत 1974 में श्रीलंका को दिए गए कच्चातिवु को छोटा द्वीप और छोटी चट्टान करार दिया था और कहा था कि यह मुद्दा अचानक नहीं उठा है। हमेशा एक जीवंत मामला था।
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