मेसर्स आईटीसीओएल के निदेशकों ने विभिन्न कंपनियों के अन्य आधिकारिक कर्मचारियों और सीए के साथ मिलीभगत करके बैंकों के एक कंसोर्टियम से लिए गए ऋणों की हेराफेरी की। ईडी की जांच में पता चला कि मेसर्स आईटीसीओएल ने बैंकों के समक्ष जाली विस्तृत परियोजना रिपोर्ट प्रस्तुत करके और डमी/शेल कंपनियों को फर्जी बिक्री दिखाकर वर्ष 2009 से 2013 तक बैंक ऑफ इंडिया के नेतृत्व वाले कंसोर्टियम से 289 करोड़ रुपये का लोन ले लिया। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), शिमला ने मेसर्स इंडियन टेक्नोमैक कंपनी लिमिटेड (मैसर्स आईटीसीओएल) के मामले में बैंक ऑफ इंडिया के नेतृत्व वाले कंसोर्टियम को लगभग 289 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्ति अब सफलतापूर्वक वापस दिला दी है।
ईडी के मुताबिक, मेसर्स आईटीसीओएल ने शेल कंपनियां और फर्जी बिक्री दिखाकर 'बैंक ऑफ इंडिया' से ऋण प्राप्त किया था। इसके अलावा, मेसर्स आईटीसीओएल द्वारा प्राप्त ऋणों का उपयोग उन उद्देश्यों के लिए नहीं किया गया, जिनके लिए उन्हें लोन स्वीकृत किया गया था। अपराध की आय (पीओसी) को सही दावेदारों तक वापस पहुंचाने की एक महत्वपूर्ण पहल के तहत, अब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), शिमला ने मेसर्स इंडियन टेक्नोमैक कंपनी लिमिटेड (मैसर्स आईटीसीओएल) के मामले में बैंक ऑफ इंडिया के नेतृत्व वाले कंसोर्टियम को लगभग 289 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्ति सफलतापूर्वक वापस दिला दी है।
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सीआईडी की एफआईआर के आधार पर ईडी ने की जांच
बता दें कि ईडी ने हिमाचल प्रदेश पुलिस की सीआईडी द्वारा मेसर्स आईटीसीओएल और उसके प्रमोटरों के खिलाफ दर्ज एफआईआर के आधार पर मामले की जांच शुरू की थी। इसमें आरोप लगाया गया था कि मेसर्स आईटीसीओएल के निदेशकों ने विभिन्न कंपनियों के अन्य आधिकारिक कर्मचारियों और सीए के साथ मिलीभगत करके बैंकों के एक कंसोर्टियम से लिए गए ऋणों की हेराफेरी की। ईडी की जांच में पता चला कि मेसर्स आईटीसीओएल ने बैंकों के समक्ष जाली विस्तृत परियोजना रिपोर्ट प्रस्तुत करके और डमी/शेल कंपनियों को फर्जी बिक्री दिखाकर वर्ष 2009 से 2013 तक बैंक ऑफ इंडिया के नेतृत्व वाले कंसोर्टियम से ऋण प्राप्त किया था। प्राप्त ऋणों का उपयोग उन उद्देश्यों के लिए नहीं किया गया, जिनके लिए लोन स्वीकृत किया गया था।
पीएमएलए के तहत जांच के दौरान, ईडी ने वर्ष 2019 में 289 करोड़ रुपये (लगभग) की संपत्ति कुर्क करते हुए एक अनंतिम कुर्की आदेश जारी किया। इन कुर्क संपत्तियों में हिमाचल प्रदेश के सिरमौर और नई दिल्ली के हौज खास में जमीन के टुकड़े हैं, जिनकी कीमत 190.95 करोड़ रुपये है।
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पीएमएलए ने संपत्तियां वापस करने का दिया आदेश
हिमाचल प्रदेश के सिरमौर में स्थित प्लांट और मशीनरी की चल संपत्तियां हैं, जिनकी कीमत 97.96 करोड़ रुपये है। इसके अलावा, मनी लॉन्ड्रिंग के अपराध के वास्तविक वैध दावेदारों और पीड़ितों को अपराध की आय (पीओसी) को बहाल करने/बहाल करने के पीएमएलए के इरादे पर विचार करते हुए, ईडी ने बैंक ऑफ इंडिया के नेतृत्व वाले कंसोर्टियम से जुड़ी संपत्ति को रिलीज करने के लिए विशेष न्यायाधीश (पीएमएलए), शिमला के समक्ष अनापत्ति प्रस्तुत की। ईडी की उपयुक्त प्रस्तुति के आधार पर, विशेष न्यायाधीश (पीएमएलए), शिमला ने बैंक ऑफ इंडिया के नेतृत्व वाले कंसोर्टियम को 289 करोड़ रुपये (लगभग) मूल्य की कुर्क की गई अचल और चल संपत्तियों को वापस करने का आदेश पारित किया।
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