डॉ. के. कस्तूरीरंगन, अंतरिक्ष वैज्ञानिक और शिक्षाविद्
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डॉ. के. कस्तूरीरंगन, अंतरिक्ष वैज्ञानिक और शिक्षाविद्
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शिक्षा सुधारों में अग्रणी भूमिका
इसरो से सेवानिवृत्त होने के बाद, डॉ. कस्तूरीरंगन ने शिक्षा के क्षेत्र में बड़ी भूमिका निभाई। वे 2003 से 2009 तक राज्यसभा सांसद रहे और इस दौरान नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड स्टडीज (एनआईएएस) के निदेशक भी रहे। वर्ष 2008 में वे कर्नाटक नॉलेज कमीशन के प्रमुख बने। 2009 से 2014 तक वे योजना आयोग के सदस्य रहे। वर्तमान सरकार ने 2017 में उन्हें राष्ट्रीय शिक्षा नीति तैयार करने वाली 9 सदस्यीय समिति का अध्यक्ष बनाया। डॉ. कस्तूरीरंगन की समिति की तरफ से तैयार एनईपी 2020 आज भारत में नई शिक्षा नीति के रूप में लागू की गई है। इसके बाद उन्हें राष्ट्रीय पाठ्यचर्या ढांचा तैयार करने की जिम्मेदारी भी सौंपी गई।
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डॉ. के. कस्तूरीरंगन, अंतरिक्ष वैज्ञानिक और शिक्षाविद्
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शैक्षणिक संस्थानों से भी गहरा नाता
वे आईआईटी रुड़की, आईआईटी मद्रास और आईआईएससी बंगलूरू जैसे देश के प्रतिष्ठित संस्थानों के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के सदस्य भी रहे। शिक्षा मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, वे हर क्षेत्र की गहराई से समझ रखने वाले व्यक्ति थे, इसलिए उन्हें चलता-फिरता ज्ञानकोश कहा जाता था।
शिक्षा और विज्ञान में सर्वोच्च सम्मान
डॉ. कस्तूरीरंगन को उनके योगदान के लिए भारत सरकार ने देश के तीन बड़े नागरिक सम्मान दिए:
- पद्मश्री (1982)
- पद्म भूषण (1992)
- पद्म विभूषण (2000)