इसरो के पूर्व वैज्ञानिक नंबी नारायणन से जुड़े 1994 के फर्जी जासूसी मामले में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से जल्दी सुनवाई की गुहार लगाई। केंद्र ने कहा कि यह राष्ट्रीय महत्व का मुद्दा है, इस पर तत्काल सुनवाई होना चाहिए। इस पर कोर्ट ने कहा कि अगले सप्ताह सुनवाई करेंगे।
बता दें, इस मामले में शीर्ष अदालत नंबी नारायणन को दोषमुक्त करार दे चुकी है। केरल पुलिस ने वैज्ञानिक नंबी नारायण को हिरासत में लेकर बुरी तरह प्रताड़ित किया था। सुप्रीम कोर्ट ने वैज्ञानिक नारायणन को बरी करने के साथ ही 50 लाख रुपये मुआवजा देने का भी आदेश दिया था।
सोमवार को सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने जांच समिति की रिपोर्ट पेश होने के चलते त्वरित सुनवाई के लिए प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष उल्लेख किया। पीठ ने कहा कि मामले की सुनवाई अगले हफ्ते की जाएगी।
राष्ट्रीय मुद्दा माना है, पर तुरंत सुनवाई जरूरी नहीं
मेहता ने पीठ को बताया कि जांच समिति ने रिपोर्ट दायर कर दी है और इस पर विचार किया जाना चाहिए क्योंकि यह एक 'राष्ट्रीय मुद्दा' है। इस पर पीठ ने कहा, 'वह इसे महत्वपूर्ण मामला मानती है लेकिन त्वरित सुनवाई आवश्यक नहीं है। हम इस पर अगले सप्ताह सुनवाई करेंगे।'
शीर्ष अदालत ने मामले में जांच के लिए अपने पूर्व न्यायाधीश (सेवानिवृत्त) डी के जैन की अध्यक्षता में 14 सितंबर, 2018 को तीन सदस्यीय समिति का गठन किया था। इस समित ने हाल में अपनी रिपोर्ट बंद लिफाफे में सुप्रीम कोर्ट को सौंप दी है।
सीबीआई ने भी दी क्लीन चिट
सीबीआई से क्लीन चिट मिलने के बाद 79 वर्षीय पूर्व वैज्ञानिक ने कहा था कि केरल पुलिस ने 'मनगढंत' मामला बनाया और उन पर जिस प्रौद्योगिकी को चुराने एवं बेचने का आरोप लगा था वह 1994 में अस्तित्व में ही नहीं थी।