उपग्रह आधारित नौवहन क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और बेहतर सेवाओं का लक्ष्य हासिल करने के लिए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने राष्ट्रीय नीति के लिए लोगों से परामर्श मांगा है। इस नीति के मसौदे को इसरो की वेबसाइट पर जारी किया गया है।
दरअसल, अंतरिक्ष विभाग (डीओएस) की योजना उपग्रह आधारित नौवहन के लिए विस्तृत और मूलभूत राष्ट्रीय नीति ‘भारतीय उपग्रह नौवहन नीति-2021’ (सैटनेव पॉलिसी-2021) बनाने की है। इसे केंद्रीय मंत्रिमंडल के समक्ष अंतिम मंजूरी के लिए रखा जाएगा। इसमें रेखांकित किया गया है कि गत कुछ दशकों में ऐसे कई एप्लिकेशन का विकास हुआ है जो स्थिति, गति और समय (पीवीटी) सेवा पर निर्भर हैं और जिसे अंतरिक्ष आधारित नौवहन प्रणाली मुहैया कराती है।
सूचना और मोबाइल फोन प्रौद्योगिकी के आने के बाद करोड़ भारतीय उपयोगकर्ता दैनिक जीवन के लगभग सभी कार्यों के लिए पीवीटी आधारित एप्लिकेशन पर निर्भर हैं। वैश्विक नौवहन उपग्रह प्रणाली (जीएनएसएस) अंतरिक्ष आधारित नौवहन प्रणाली है, जो पूरी दुनिया में नौवहन सेवाएं मुहैया कराते हैं।
यूरोपीय, इस्राइल अंतरिक्ष एजेंसियों के साथ उच्च स्तरीय सहयोग करेगा इसरो
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) यूरोपीय और इस्राइली अंतरिक्ष एजेंसियों के साथ सहयोग बढ़ाने और अवसरों की तलाश के लिए बातचीत कर रहा है। अंतरिक्ष विभाग के सचिव और इसरो के अध्यक्ष के सिवन ने पिछले हफ्ते इस्राइल अंतरिक्ष एजेंसी (आईएसए) के महानिदेशक एवी ब्लैसबर्जर और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ईएसए) के महानिदेशक जोसेफ असचबैकर के साथ ऑनलाइन बैठकें कीं।
सिवन और ब्लैसबर्जर ने छोटे उपग्रहों के लिए विद्युत प्रणोदन प्रणाली और जीईओ-एलईओ ऑप्टिकल लिंक में सहयोग सहित जारी गतिविधियों की प्रगति की समीक्षा की। इसरो ने एक बयान में बताया कि उन्होंने भारतीय प्रक्षेपक से इस्राइली उपग्रहों का प्रक्षेपण और स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगांठ एवं भारत-इस्राइल के राजनयिक संबंधों के 30 साल पूरे होने के अवसर पर 2022 में एक उपयुक्त कार्यक्रम आयोजित करने समेत भविष्य में एक साथ काम करने के संभावित अवसरों पर भी चर्चा की।
सिवन और असचबैकर ने पृथ्वी के पर्यवेक्षण, अंतरिक्ष विज्ञान, उपग्रह नेविगेशन, अंतरिक्ष स्थितिजन्य जागरूकता और मानव अंतरिक्ष उड़ान में चल रही सहयोगात्मक गतिविधियों की स्थिति की समीक्षा की।