बालाकोट में हवाई हमले पर जारी सियासत के बीच वायुसेना ने केंद्र सरकार को बुधवार को सभी सुबूत सौंप दिए हैं। इनमें हवाई हमले की तस्वीरें भी शामिल हैं। सूत्रों के अनुसार, 12 पेज की रिपोर्ट में वायुसेना ने बालाकोट में हमले वाली जगह की एचडी तस्वीरें भी साझा की हैं। हालांकि इस रिपोर्ट को सार्वजनिक करने का फैसला सरकार ही लेगी।
सूत्रों का कहना है कि वायुसेना के मिराज-2000 विमान ने जैश के ठिकानों को निशाना बनाने के लिए इस्राइल निर्मित स्पाइस 2000 ग्लाइड बमों का इस्तेमाल किया था। विपक्ष और कुछ अंतरराष्ट्रीय मीडिया का दावा है कि हमले के बाद भी बालाकोट में इमारतें जस की तस खड़ी हैं और उनको कोई नुकसान नहीं हुआ।
हालांकि, ऐसी रिपोर्ट्स हैं 26 फरवरी को घने बादल होने की वजह से भारतीय जासूसी उपग्रह एयर स्ट्राइक के बाद आतंकी ठिकानों की तस्वीरें नहीं ले पाए थे। हालांकि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के बनाए हुए उपग्रह रिसात-2, जो इस समय राष्ट्रीय तकनीकी अनुसंधान संगठन (एनटीआरओ) के नियंत्रण में है उसके पास यह क्षमता है कि वह घने बादल होने के बावजूद धरती की तस्वीरें ले सकता है। वह ऐसा रात में भी कर सकता है।
इस जासूसी उपग्रह में इजरायल का एक्स-बैंड सिंथेटिक अपर्चर रडार लगा हुआ है जिसके जरिए यह एक मीटर तक रिसोल्यूशन को जूम कर सकता है। यानी यह दो चीजों के अंतर को 1 मीटर तक कर सकता है। इसरो के एक सूत्र ने कहा, 'टोही (जासूसी) उपग्रह किसी इमारत या वस्तु की एक दिन में 2-3 बार तस्वीर ले सकता है।' यह जासूसी उपग्रह किसी स्थान की पृथ्वी की परिक्रमा करते हुए 24 घंटे में तीन बार तस्वीर ले सकता है इसलिए इसका इस्तेमाल हवाई हमले के कारण जेईएम के शिविरों में हुई तबाही की छवियों को खींचने के लिए किया जा सकता है।
2008 में हुए मुंबई हमले के बाद रिसात-2 कार्यक्रम को रिसात-1 के मुकाबले प्राथमिकता के तौर पर लिया गया क्योंकि इसमें एडवांस रडार सिस्टम था। इसे 20 अप्रैल, 2009 को लांच किया गया ताकि सुरक्षाबलों की सर्विलांस की क्षमताओं को उन्नत बनाया जा सके। 536 किलोमीटर की ऊंचाई से यह उपग्रह 24 घंटे भारत की सीमाओं की निगरानी कर रहा है। वह सुरक्षाबलों को घुसपैठ और आतंकरोधी अभियानों पर कड़ी नजर बनाए रखने में मदद करता है।
भारत के पास एक और एडवांस रिमोट सेंसिंग सैटेलाइट कार्टोसेट-2 है। जिसके जरिए सुरक्षाबल पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर और पाकिस्तान के दूसरे हिस्सों में मौजूद आतंकी कैंपों पर नजर रखते हैं। इन उपग्रहों में रात में भी सर्विलांस करने की क्षमता है। इसरो के एक सूत्र के अनुसार, 'भारत के 47 उपग्रह परिचालन में हैं। जिसमें से छह से आठ का इस्तेमाल केवल सैन्य उद्देश्य के लिए होता है।'