इसरो जीएसएलवी-एमके-3 की क्षमता में सुधार करने की प्रक्रिया पर काम कर रहा है, ताकि सरकार द्वारा अनुमति मिलने के बाद इस विशालकाय रॉकेट को अंतरिक्ष में मानव मिशनों के लिए तैयार किया जा सके। इसरो के पूर्व प्रमुख के कस्तूरीरंगन ने यह बात कही।
उन्होंने कहा कि जीएसएलवी मार्क-3 वास्तव में आने वाले सालों में भू-तुल्यकालिक मिशनों और बेहद भारी स्पेसक्राफ्ट को पृथ्वी के नजदीक अंतरिक्ष में पहुंचाने वाला एक वाहन साबित होगा। इसरो इसकी क्षमता में सुधार कर दस टन तक के भार को अंतरिक्ष में पहुंचाने लायक बनाने पर काम कर रहा है।
उन्होंने कहा कि एमके-3 की मदद से ही हम अपना एक भारी-भरकम संचार सैटेलाइट लॉन्च करने में कामयाब हुए। अब हम भविष्य के संचार सैटेलाइटों को अंतरिक्ष में पहुंचाने में सक्षम हो गए हैं, जो पारंपरिक सैटेलाइटों की तुलना में बेहद भारी होंगे। जबकि पहले भारत इसके लिए विदेशी अंतरिक्ष एजेंसियों पर निर्भर था।
उन्होंने यह भी कहा कि जब हमें जरूरत होगी और देश मानव को अंतरिक्ष यात्रा पर भेजने का फैसला लेगा, तब एमके-3 अपनी क्षमता पर उभर कर सामने आएगा। हम इसके माध्यम से अंतरिक्ष में कई प्रकार के मिशनों को अंजाम दे सकते हैं।