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ईओएस-03 उपग्रह: मंत्री जितेंद्र सिंह बोले- अंतरिक्ष में स्थापित होकर रहेगा इसरो मिशन का कार्यक्रम

Thu, 12 Aug 2021 12:59 PM IST
अजय सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

भारत भले ही अंतरिक्ष में एक और मील का पत्थर स्थापित करने से चूक गया हो। लेकिन, हमारी उम्मीदें अभी भी जिंदा हैं। इसरो जल्द ही ईओएस-03 उपग्रह के प्रक्षेपण को दोबारा शुरू कर सकता है।
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जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल-एफ 10 ईओएस-03 के प्रक्षेपण के लिए काउंटडाउन सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र पर शुरू हो चुका है। - फोटो : ISRO Twitter Handle
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विस्तार
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भारत भले ही अंतरिक्ष में एक और मील का पत्थर स्थापित करने से चूक गया हो। लेकिन, हमारी उम्मीदें अभी भी जिंदा हैं। इसरो जल्द ही ईओएस-03 उपग्रह के प्रक्षेपण को दोबारा शुरू कर सकता है। यह जानकारी अंतरिक्ष विभाग के केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने ट्विटर के माध्यम से दी है।   

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केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने इसरो के उपग्रह मिशन पर ट्वीट करते हुए बताया कि ईओएस-02 उपग्रह के प्रक्षेपण पर उनकी बात इसरो चेयरमैन डॉ. के सिवन से हुई है। उनके मुताबिक उपग्रह के पहले दो चरण ठीक तरह से गुजरे। लेकिन, क्रेयोजेनिक स्टेज में कुछ तकनीकि खराबी के चलते लांच से कुछ सेकेंड पर ही मिशन को रोकना पड़ा। हालांकि, इसरो जल्द ही इस मिशन को रीशेड्यूल करने की तैयारी कर रहा है। 

लांच से पहले दो चरण रहे थे सामान्य 
जीएसएलवी-एफ 10 ईओएस-03 मिशन के GISAT-1 उपग्रह को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन स्पेस सेंटर से लांच किया गया था। इसरो वैज्ञानिकों के अनुसार 51.70 मीटर लंबे रॉकेट को 26 घंटे की उलटी गिनती के बाद स्पेसपोर्ट के समयनुसार 5:43 मिनट पर सेकेंड लांच पैड से ब्लास्ट किया गया था। स्पेस एजेंसी के अनुसार पहला और दूसरा चरण सामान्य रहा था। हालांकि, इसरो के मिशन कंट्रोल रूम के अनुसार उड़ान का परीक्षण शुरू किया तो सात मिनट पहले सन्नाटा छा गया। कुछ समय बाद स्पेस एजेंसी ने मिशन को पूरा ना किए जा सकने की घोषणा कर दी।इसको लेकर स्पेस एजेंसी इसरो ने ट्वीट भी किया है। इसके अनुसार मिशन निर्धारित समयानुसार 5:43 पर शुरू हुआ था। पहला और दूसरा चरण सामान्य था। लेकिन, क्रेयोजेनिक अपट स्टेज के दौरान तकनीकि खराबी सामने आयी, जिसक कारण मिशन को पूरा नहीं किया जा सका। यह आठवां मौका था जब इसरो तीसरे चरण में स्वदेशी क्रेयोनेजिन का इस्तेमाल कर रहा था। इससे पहले जीएसएलवी एमके-3 द्वारा च्रदंयान को, उसके गगनयान मिशन के तहत एक अंतरिक्षण यात्री को ले जाया गया है। इसके साथ एक उप-कक्षीय उड़ान समेत चारों उड़ानें सफल रही हैं। 
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मिशन सफल होता तो मिलती बड़ी मदद
इस मिशन के तहत इसरो अंतरिक्षण की कक्षा में उपग्रह को स्थापित करने जा रहा था, जिससे धरती की निगरानी हो सके। इसरो के अनुसार GISAT-1 उपग्रह अंतरिक्ष से धरती की निगरानी करता। इससे कृषि, बादलों, बर्फबारी, जंगलों के बारे में कई जानकारियां प्राप्त हो सकती थीं। इसरो के एक वैज्ञानिक के अनुसार, अगर यह मिशन अपने उद्देश्य को पूरा करता तो भारत को प्राकृतिक आपदाओं व अन्य कई चीजों के बारे में जानकारी मिल सकती। 

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