इसरो प्रमुख वी. नारायणन ने कहा कि भारत की अंतरिक्ष तकनीक ने वैश्विक सराहना प्राप्त की है। उन्होंने निसार सैटेलाइट लॉन्च को ऐतिहासिक बताया और कहा कि अब भारत विकसित देशों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रहा है। स्वदेशी तकनीक, उन्नत स्टील व कंपोजिट्स में सफलता भारत की आत्मनिर्भरता दर्शाती है। CSIR और ISRO के सहयोग से तकनीकी संप्रभुता की दिशा में कदम बढ़ रहे हैं।
इसरो के अध्यक्ष डॉ. वी. नारायणन ने शुक्रवार को कहा कि भारत की अंतरिक्ष तकनीक आज इतनी विकसित हो चुकी है कि दुनिया की अग्रणी शक्तियां भी इसकी सराहना कर रही हैं। वे तिरुवनंतपुरम में आयोजित एक सम्मेलन में बोल रहे थे, जिसका आयोजन सीएसआईआर-नेशनल इंस्टिट्यूट फॉर इंटरडिसिप्लिनरी साइंस एंड टेक्नोलॉजी के स्वर्ण जयंती वर्ष के अवसर पर किया गया था।
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इसरो प्रमुख ने कहा कि हाई-स्ट्रेंथ स्टेनलेस स्टील, कम थर्मल कंडक्टिविटी वाले कंपोजिट्स और अन्य सामरिक सामग्रियों में स्वदेशी विकास ने भारत को आत्मनिर्भर बनने में मदद की है। उन्होंने कहा कि इसरो और सीएसआईआर को राष्ट्रीय क्रिटिकल मिनरल मिशन के तहत सहयोग कर उन्नत सामग्रियों के क्षेत्र में नवाचार और तकनीकी संप्रभुता को बढ़ाना चाहिए।
गौरवशाली इतिहास से वर्तमान तक
नारायणन ने भारत की अंतरिक्ष यात्रा को पिछले पांच दशकों में एक प्रेरणादायक सफर बताया। उन्होंने कहा कि देश ने जिस यात्रा की शुरुआत अमेरिकी रॉकेट की मदद से की थी, आज वह विकसित देशों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रहा है। उन्होंने 30 जुलाई को लॉन्च हुए इसरो-नासा संयुक्त उपग्रह ‘निसार’ को एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताया और कहा कि इस प्रक्षेपण के पीछे भारतीय विशेषज्ञों और ज्ञान की अहम भूमिका रही।
सीएसआईआर की भूमिका को सराहा
इसरो प्रमुख ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सीएसआईआर के योगदान की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि सीएसआईआर ने खाद्य सुरक्षा से लेकर कचरे से उपयोगी वस्तुएं बनाने तक कई अहम क्षेत्रों में उल्लेखनीय काम किया है। इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि देश की आजादी के 77 वर्षों में विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में बहुत बड़ी प्रगति हुई है।
देश को बनाना होगा खनिजों में आत्मनिर्भर
सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहे सीएसआईआर-एनएसआईआईटी के निदेशक डॉ. सी. आनंदरमकृष्णन ने इस बात पर जोर दिया कि देश को अपनी खनिज और सामग्री आयात पर निर्भरता को पूरी तरह खत्म करना होगा। इस दौरान कई वरिष्ठ वैज्ञानिकों ने भी संबोधन दिया और भारत के लिए क्रिटिकल मिनरल्स व सस्टेनेबल मटेरियल टेक्नोलॉजी के भविष्य पर अपने विचार साझा किए।