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गद्दारी का ठप्पा लेकर नहीं मरना चाहते थे नांबी नारायण, 26 साल लंबी कानूनी लड़ाई के बाद मिला जीत का ईनाम

Thu, 13 Aug 2020 09:20 AM IST
Tanuja Yadav न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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नांबी नारायणन - फोटो : Social media
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26 साल की लंबी कानूनी लड़ाई लड़ने के बाद नांबी नारायण अब कोर्ट के फैसले से संतुष्ट हैं। नांबी नारायण की उम्र 79 वर्ष है और वो भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के पूर्व वैज्ञानिक हैं। उन्होंने कहा कि वो पूरी तरह से संतुष्ट तब होंगे जब उन अधिकारियों को सजा मिलेगी, जिन्होंने नांबी नारायण को देश की जासूसी करने के मामले में फंसाया था।

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नांबी नारायण तिरुवनंतपुरम में रहते हैं और उन्हें राज्य सरकार से 1.30 करोड़ रुपये की आखिरी किस्त भी मिल गई है। इस पर नांबी नारायण ने कहा कि जिन अधिकारियों ने गुमराह कर उन्हें झूठे मामले मे फंसाया, जबतक उन्हें सजा नहीं मिल जाती, तब तक पूरी तरह से संतुष्टी नहीं मिलेगी। 

नांबी नारायण ने कहा कि उन्हें राज्य सरकार की ओर से मिले भारी मुआवजे में कोई रूचि नहीं है। उन्होंने ये बात सुप्रीम कोर्ट में भी कही। उन्होंने कहा कि उन्हें अपनी लड़ाई को जिंदा रखना था, तभी शायद अभी तक वो जीवित हैं। 26 साल की लंबी लड़ाई के बद नांबी नारायण थक चुके हैं।
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उन्होंने बताया कि उन्हें उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित किया गया जैन आयोग दोषी अधिकारियों पर जिम्मेदारी तय करेगा। उन्होंने कहा कि मुझे इस बात की खुशी है कि लोगों ने इस बात को स्वीकार कर लिया है कि वो निर्दोष हैं, वो कभी भी देश के गद्दार के आरोप के साथ नहीं मरना चाहते थे।

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नांबी नारायण इस जीत के इतने खुश हैंं कि वो दोबारा इस लड़ाई के बारे में बात नहीं करना चाहते। उन्होंने कहा कि इस मामले मीडिया में मौजूद कुछ लोगों की भी गलती है, वो जनता के सामने रसदार कहानियां लेकर आए। उन्होंने बताया था कि पहले ही दिन से उनकी आस्था सही थी, जब दो पुलिसवाले उनके घर आए थे और उन्हें पुलिस स्टेशन ले गए थे।

नांबी नारायण ने कहा के हर एजेंसी को अपनी दायित्व और कर्तव्यों से परिपूर्ण तरीके से जागरुक होना चाहिए।  उन्होंने कहा कि ऐसे कई मामले हैं जिनमें अलग-अलग एजेंसियों के बीच समन्वय में परेशानी देखी जाती है। इस देश में एक काउंसटेबल या पुलिस एक प्रोजेक्ट डायरेक्टर को गिरफ्तार और उसे प्रताड़ित कर सकता है।

नांबी नारायण ने कहा कि इस लड़ाई के दौरान उन्होंने महसूस किया कि सिस्टम में पारदर्शिता होनी चाहिए। जो लोग निर्दोष हैं, उन्हें लड़ना चाहिए, हालांकि न्याय मिलने में देरी हो सकती है लेकिन लड़ना जरूर चाहिए। जब पिछले साल मुझे पद्मभूषण मिला था तब मैं बेहद खुश था।
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नांबी नारायण ने कहा कि अभी लड़ाई और भी बाकी है लेकिन मेरी उम्र बहुत ज्यादा हो चुकी है, अब मैं और नहीं लड़ सकता लेकिन कुछ सवालों के जवाब जरूर मिलने चाहिए कि आखिर मुझ पर ये आरोप क्यों लगे और मामले में साजिश रचने वाले असली लोग कौन हैं।

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