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ISRO: इसरो ने आदित्य-एल1 सौर मिशन का लॉन्च रिहर्सल पूरा किया, दो सितंबर को श्रीहरिकोटा से किया जाएगा प्रक्षेपण

Wed, 30 Aug 2023 02:08 PM IST
देव कश्यप पीटीआई, बंगलूरू।

सार

आदित्य-एल1 अंतरिक्ष यान को सौर कोरोना का रिमोट ऑब्जर्वेशन और और एल-1 (सूर्य-पृथ्वी लैग्रेंजियन बिंदु) पर सौर हवा का सीटू ऑब्जर्वेशन के लिए डिजाइन किया गया है, जो पृथ्वी से लगभग 15 लाख किलोमीटर दूर है।
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आदित्य-एल1 मिशन का लॉन्च रिहर्सल और रॉकेट की आंतरिक जांच पूरी। - फोटो : ISRO
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विस्तार
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भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने सूर्य का अध्ययन करने के लिए अपने आदित्य-एल1 मिशन के बारे में ताजा जानकारी देते हुए बुधवार को कहा कि लॉन्च रिहर्सल और रॉकेट की आंतरिक जांच पूरी हो चुकी है। अंतरिक्ष यान को दो सितंबर को सुबह 11.50 बजे श्रीहरिकोटा स्पेसपोर्ट से लॉन्च किया जाना है।

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आदित्य-एल1 अंतरिक्ष यान को सौर कोरोना का रिमोट ऑब्जर्वेशन और और एल-1 (सूर्य-पृथ्वी लैग्रेंजियन बिंदु) पर सौर हवा का सीटू ऑब्जर्वेशन के लिए डिजाइन किया गया है, जो पृथ्वी से लगभग 15 लाख किलोमीटर दूर है। सूर्य के ऑब्जर्वेशन के लिए इसरो द्वारा लॉन्च किया जाने वाला यह पहला समर्पित भारतीय अंतरिक्ष मिशन होगा। अंतरिक्ष यान यानी सूर्य का अध्ययन करने वाला पहला अंतरिक्ष-आधारित भारतीय वेधशाला पीएसएलवी-सी57 (PSLV-C57) रॉकेट द्वारा लॉन्च किया जाएगा।

इसरो ने गुरुवार को एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, प्रक्षेपण की तैयारियां प्रगति पर हैं। लॉन्च रिहर्सल और वाहन की आंतरिक जांच पूरी हो गई है। आदित्य-एल1 मिशन का उद्देश्य एल-1 के चारों ओर की कक्षा से सूर्य का अध्ययन करना है। यह अंतरिक्ष यान विभिन्न तरंग बैंडों में प्रकाशमंडल, क्रोमोस्फीयर और सूर्य की सबसे बाहरी परतों, कोरोना का निरीक्षण करने के लिए अपने साथ सात पेलोड ले जाएगा।
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इसरो के एक अधिकारी ने कहा, आदित्य-एल1 को राष्ट्रीय संस्थानों की साझेदारी के साथ पूर्णतः स्वदेशी रूप से विकसित किया गया है। बेंगलुरु स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एस्ट्रोफिजिक्स (आईआईए) विजिबल एमिशन लाइन कोरोनाग्राफ (वीईएलसी) पेलोड को विकसित करने वाला एक अग्रणी संस्थान है। वहीं, इंटर-यूनिवर्सिटी सेंटर फॉर एस्ट्रोनॉमी एंड एस्ट्रोफिजिक्स, पुणे ने इस मिशन के लिए सोलर अल्ट्रावॉयलेट इमेजर पेलोड विकसित किया है।



आदित्य-एल1 अल्ट्रावॉयलेट पेलोड का उपयोग करके कोरोना और सौर क्रोमोस्फीयर पर और एक्स-रे पेलोड का उपयोग करके फ्लेयर्स के बारे में ऑब्जर्वेशन प्रदान कर सकता है। पार्टिकल डिटेक्टर और मैग्नेटोमीटर पेलोड आवेशित कणों और एल-1 के चारों ओर बाहरी कक्षा तक पहुंचने वाले चुंबकीय क्षेत्र के बारे में जानकारी प्रदान कर सकते हैं।

आईआईए ने मंगलवार को बताया था कि उसने ‘विजिबल एमिशन लाइन कोरोनाग्राफ’ (वीईएलसी) का डिजाइन तैयार करने के साथ ही इसका संयोजन और परीक्षण किया है, जो सूर्य के अध्ययन के लिए भारत के पहले समर्पित वैज्ञानिक मिशन ‘आदित्य-एल1’ के सात उपकरणों में से एक है। सूर्य के व्यापक अध्ययन और ऑब्जर्वेशन के लिए उपग्रह अपने साथ छह अन्य उपकरण भी ले जाएगा जिनमें सोलर अल्ट्रावॉयलेट इमेजिंग टेलीस्कोप (एसयूआईटी), आदित्य सोलर विंड पार्टिकल एक्सपेरीमेंट (एएसपीईएक्स), प्लाज्मा एनालाइजर पैकेज फॉर आदित्य (पीएपीए), सोलर लो एनर्जी एक्स-रे स्पेक्ट्रोमीटर (एसओएलईएक्सएस), हाई एनर्जी एल1 ऑर्बिटिंग एक्स-रे स्पेक्ट्रोमीटर (एचईएल1ओएस), और मैग्नेटोमीटर शामिल हैं।
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