भारत में इस्राइल के राजदूत रुवेन अजार ने पश्चिम एशिया में जारी तनाव और ईरान के साथ तनातनी को लेकर कहा है कि उनका देश आतंकियों के सामने समर्पण नहीं कर सकता। साथ ही ईरान के हमले पर उन्होंने कहा कि ईरान को इसकी कीमत चुकानी होगी और हमारे प्रधानमंत्री ये साफ कर चुके हैं। तो आइए जानते हैं कि इस्राइली राजदूत ने पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात और ईरान को लेकर क्या-क्या कहा।
'ईरान को रोकने की जिम्मेदारी हमारी'
रुवेन अजार ने कहा कि 'हमें पूरा यकीन है कि हम ईरान के हमले को बेअसर करने में सफल रहे क्योंकि हमारी हवाई सुरक्षा दुनिया में सबसे बेहतर है। हमने अधिकतर मिसाइलों को हवा में ही तबाह कर दिया और जो मिसाइलें गिरीं भी उनसे खास नुकसान नहीं हुआ। हम ईरान को जवाब देने के लिए पूरी तरह से समर्पित हैं। हमारे प्रधानमंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा कि ईरान को इसकी कीमत चुकानी होगी। अगर इस पर लगाम नहीं लगाई गई, तो इस क्षेत्र के लिए परिणाम भयानक होंगे। अगर कोई ईरान को रोकने वाला नहीं है, तो यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम ईरान को रोकें।'
आतंकियों के सामने आत्मसमर्पण नहीं कर सकते
बीते साल 7 अक्तूबर को हमास के हमले को लेकर इस्राइली राजदूत ने कहा कि 'हम इससे स्तब्ध तो हुए, लेकिन हम हमास के खतरे को बेअसर करने के लिए दृढ़ संकल्पित भी हुए। इजरायली समाज ने इस मुद्दे पर आवाज उठाई। हम आतंकवादियों से लड़ रहे हैं और मुझे यकीन है कि हम जीतेंगे। हम 150 बंधकों को छुड़ाने में कामयाब रहे हैं और 101 बंधक अभी भी हमास के पास हैं। हमने समझौता करने की कोशिश की है। दुर्भाग्य से, हमास ने ऐसा करने से इनकार कर दिया। हम आतंकवादियों के सामने आत्मसमर्पण नहीं कर सकते।'
इस्राइल सरकार द्वारा संयुक्त राष्ट्र महासचिव को 'अवांछित व्यक्ति' घोषित किए जाने पर राजदूत अजार ने कहा, 'संयुक्त राष्ट्र महासचिव का बयान देखकर गुस्सा आया। जब ऐसा अपराध और अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन होता है, तो शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए जिम्मेदार व्यक्ति से इस पर आवाज उठाने की उम्मीद की जाती है, लेकिन संयुक्त राष्ट्र महासचिव इसमें विफल रहे। हम चाहते हैं कि संयुक्त राष्ट्र सकारात्मक भूमिका निभाए।'
प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ की
पीएम मोदी के इस्राइली पीएम से बात करने पर रुवेन अजार ने कहा कि 'हम भारत सरकार और खास तौर पर प्रधानमंत्री मोदी के दृष्टिकोण से बहुत उत्साहित हैं। हमें उनके जैसे नेताओं की ज़रूरत है जो दृढ़ निश्चयी हों और मानवता के लिए इस खतरे के खिलाफ़ मज़बूती से खड़े हों। भारत को तय करना है कि वह क्या भूमिका निभाना चाहता है। हम अपने क्षेत्र में शांति और स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए भारतीय सरकार के साथ मिलकर काम करना जारी रखेंगे। अगर हम आतंक के खिलाफ़ अपनी जंग जीतने में सफल होते हैं, तो इससे न सिर्फ़ इस्राइल बल्कि क्षेत्र के सभी देश कनेक्टिविटी परियोजनाओं का लाभ उठा सकेंगे।'
इस्राइल में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर उन्होंने कहा कि 'हम सभी भारतीय नागरिकों को सुरक्षित रख रहे हैं और उन्हें किसी भी खतरे से दूर रख रहे हैं। फिलहाल, मुझे नहीं लगता कि इस्राइल में किसी भारतीय को कोई खतरा है।'