राहुल गांधी लगातार यह बता रहे हैं कि कैसे कांग्रेस शासित राज्यों में वह कोविड-19 संक्रमण को रोकने के लिए सुझाव देने, रिपोर्ट लेने में सक्रिय हैं। कांग्रेस शासित राज्यों या कांग्रेस की गठबंधन सरकार के मुख्यमंत्री अथवा कमलनाथ जैसे पूर्व मुख्यमंत्री भी राहुल गांधी के प्रयासों और सुझाव की तारीफ कर रहे हैं।
गुरुवार 23 अप्रैल को कांग्रेस कार्यसमिति की वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए बैठक होनी है। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि इसी में आगे की रणनीति भी तय की जाएगी। इसमें राहुल गांधी की सक्रियता पर चर्चा की बात सूत्रों से पता चली है।
पार्टी के तमाम नेताओं की तरह महिला कांग्रेस अध्यक्ष सुष्मिता देव का भी मानना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों पर सवाल उठाने के लिए राहुल ही सबसे मजबूत चेहरा हैं।
चर्चा के दौरान सुष्मिता कहती हैं कि आप राहुल गांधी के सवाल उठाने पर भले सवाल उठा दें, लेकिन कोई हमें बताए कि राहुल गांधी ने कौन सा गलत मुद्दा उठाया? क्या यह सच नहीं है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पिछली सरकार में नोटबंदी और जीएसटी के खिलाफ उन्होंने मजबूती से आवाज उठाई थी?
सुष्मिता सवाल पूछती हैं कि आखिर आप हमें बताइए, अभी विपक्ष का कौन सा नेता सरकार को आइना दिखाने के लिए बोल रहा है? सुष्मिता देव की तरह कांग्रेस में कई लोगों का मानना है कि पार्टी को अच्छा भविष्य राहुल गांधी ही दे सकते हैं।
कांग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष ने कोविड-19 को लेकर काफी पहले सरकार का ध्यान आकर्षित किया था। वह 12 फरवरी से ही इस मुद्दे को उठा रहे हैं। राहुल खुद कहते हैं कि जब उन्होंने यह मुद्दा उठाया तो सत्ता पक्ष के लोगों ने उनका उपहास तक करने की कोशिश की।
मध्यप्रदेश में कमलनाथ की सरकार गिरने और देश में लॉकडाउन लागू होने के बाद राहुल गांधी ने कोविड-19 के खतरे और स्वास्थ्य आपातकाल जैसी स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार के प्रति सहयोगात्मक रुख अपनाया पर साथ ही वह केंद्र सरकार को चेताते भी रहे।
मनरेगा के मजदूरों, लघु, सूक्ष्म, मध्यम उद्योगों को राहत देने, गरीबों को अनाज, सब्सिडी का सीधे खाते में पैसा, किसानों को राहत देने के लिए उनकी मांग उठाते रहे। कुछ दिन पहले राहुल गांधी ने विस्तृत प्रेस वार्ता भी की थी।
तब भी उन्होंने केंद्र सरकार के साथ राजनीति न करने, पार्टी से ऊपर उठकर सोचने, सरकार को सहयोग देने की ही बात कही। उन्होंने केंद्र सरकार से कोविड-19 से लड़ने के लिए ठोस दूरगामी रणनीति बनाकर आगे बढ़ने, देश के गांवों, अर्थव्यवस्था में पैसा डालने का अनुरोध किया।
राहुल गांधी की टीम में शामिल एक युवा नेता का कहना है कि ज्योतिरादित्य के कांग्रेस छोड़ देने की राहुल को उम्मीद नहीं थी। इसलिए ज्योतिरादित्य के भाजपा में जाने के बाद वह कुछ दिन तक परेशान भी दिखे।
बताते हैं राहुल गांधी को उम्मीद थी कि मध्य प्रदेश में ज्योतिरादित्य कांग्रेस को काफी नुकसान पहुंचा सकते हैं, लेकिन अब उनका आत्मविश्वास लौट आया है। उनको भी लग रहा है कि मध्य प्रदेश का 24 सीटों पर होने वाला विधानसभा का उपचुनाव काफी रोचक होगा।