पाकिस्तान में एक बार फिर सेना के शासन की अटकलें लगने लगी हैं। इसके चलते पहले से ही अस्थिरता से जूझ रहे देश में राजनीतिक माहौल गरम होने लगा है। इस बात की सुगबुगाहट तब शुरू हुई जब पाकिस्तान के पंजाब की एक छोटी और कम पहचानी जाने वाली राजनीतिक पार्टी ने देश के 13 शहरों में पोस्टर लगाते हुए सेना प्रमुख राहिल शरीफ से रिटायरमेंट न लेने और देश में मार्शल लॉ लागू करने की मांग की है।
पाकिस्तान के कराची, पेशावर, क्वेटा, रावलपिंडी, फैसलाबाद, सारगोधा और हैदराबाद जैसे प्रमुख शहरों में भी यह बैनर लगाए गए हैं। इसमें पाकिस्तान के सेना प्रमुख से नवंबर में होने वाले अपने रिटायरमेंट को लेकर सोचने की बात कही गई है। कराची में रेंजर्स हाउस और मुख्यमंत्री आवास के बीच लगे पोस्टर में कहा गया है कि 'जाने की बातें हुई पुरानी, खुदा के लिए अब आ जाओ'। यह सीधे तौर पर राहील शरीफ से कहा गया है क्योंकि पोस्टर में उनकी तस्वीरें भी हैं।
इस पोस्टर को लगाने वाली पार्टी के मुख्य संयोजक अली हाशमी ने पाकिस्तान के प्रमुख अखबार डॉन को बताया कि हमारे प्रचार का मुख्य मकसद सेना प्रमुख को इस बात के लिए सुझाव देना है कि देश में मॉर्शल लॉ लगाकर वो टेक्नोक्रेट की एक सरकार बनाएं। साथ ही उस सरकार को खुद ही जनरल राहील शरीफ देंखे।
वहीं सेना के मुखपत्र इंटर सर्विस पब्लिक रिलेशन अभी तक इस मामले में शांत है। विशेषज्ञ अमीर राना कहते हैं कि यह हालिया कदम इस तरफ इशारा करते हैं कि कुछ तो अंदरूनी खाने में चल रहा था। पाकिस्तान मामलों के विशेषज्ञ भी मानते हैं जिस तरह से इस मुस्लिम देश के हालात चल रहे हैं ऐसे में इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता कि सेना कभी भी बड़ा कदम उठा सकती है।
विशेषज्ञ अमीर राना कहते हैं कि इस प्रचार के पीछे कुछ छुपी हुई ताकतें भी हो सकती हैं। इस मुद्दे पर टीवी शो और सोशल मीडिया पर भी चर्चाओं का बाजार गर्म है। वैसे भी पाकिस्तान की राजनीति हमेशा से ही उतार चढ़ावों से भरी रही है। इसलिए किसी भी संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। बहरहाल आप भी दीजिए इस मुद्दे पर अपनी राय।
क्या पाकिस्तान में फिर लौट सकता है सेना का शासन?