अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर डील पर पक्ष विपक्ष में मचे घमासान के बीच विपक्षी कांग्रेस मुश्किल में फंसती दिख रही हैं, इसकी वजह बन रहा है राज्यसभा का वो पुराना रिकार्ड जिसमें अगस्ता डील पर खुद तत्कालीन रक्षामंत्री एके एंटनी ने बयान दिया था।
अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस की खबर के अनुसार अगस्ता डील मामले में रिश्वतखोरी का मामला सामने आने के कुछ दिन बाद ही दिसंबर 2013 में राज्यसभा में एक सवाल का जवाब देते हुए तत्कालीन रक्षामंत्री एके एंटनी ने कहा था कि सरकार ने अभी कंपनी पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया गया है।
सत्ता खोने से पांच महीने पहले 11 दिसंबर 2013 को राज्यसभा में दिए अपने बयान में रक्षामंत्री एंटनी का जवाब था कि कंपनी को दिए गए कारण बताओ नोटिस का जवाब अभी जांच के दायरे में है।
राज्यसभा में दिए बयान में एंटनी ने माना था, नहीं किया प्रतिबंधित
खास बात ये है कि पिछले हफ्ते ही कांग्रेस की ओर से कहा गया था कि सरकार की ओर से अगस्ता और उसकी सहयोगी कंपनी फिनमैनिका को उसी समय प्रतिबंधित कर दिया गया था और भाजपा सरकार के सत्ता में आने पर प्रतिबंध को वापस ले लिया गया।
कांग्रेस की ओर से यह बयान उस समय आया था जब पिछले हफ्ते ही इटली की एक अदालत ने इस डील में रिश्वतखोरी के मामले में दो लोगों को जेल की सजा सुनाई थी। लेकिन पार्टी का यह बयान उस समय एके एंटनी द्वारा दिए गए बयान से मेल नहीं खाता, ऐसे में यह सवाल खड़ा हो गया है कि क्या कांग्रेस झूठ बोल रही है।
एंटनी ने इसके कुछ दिन बाद ही फरवरी 2014 में राज्यसभा में एक बार फिर बयान दिया कि कंपनी का अनुबंध समाप्त कर दिया गया है, लेकिन अभी तक कंपनी को डिबार करने के संबंध में कोई निर्णय नहीं लिया गया है।
एंटनी का बयान बन सकता है कांग्रेस के गले की फांस
सोनिया गांधी और राहुल गांधी के साथ कुलदीप बिश्नोई
- फोटो : अमर उजाला
एंटनी ने उस समय तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य सुखेंदू शेखर राय द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में कहा था कि अभी कंपनी की ओर से वीवीआईपी हेलीकॉप्टर डील के संबंध में कंपनी की ओर से अभी कुछ कागजात दिए गए हैं जिनकी जांच की जा रही है, सीबीआई भी मामले की जांच कर रही है। अगस्ता वेस्टलैंड को दिए गए कारण बताओ नोटिस के जवाब का भी परीक्षण किया जा रहा है, इसलिए अभी कंपनी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
वहीं इस संबंध में पूछने पर पूर्व रक्षामंत्री एके एंटनी ने कहा, मैं पहले ही कह चुका हूं हमने फरवरी 2013 में ही कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने की तैयारी शुरू कर दी थी, लेकिन दुर्भाग्यवश हमें इसे पूर्ण नहीं कर सके, क्योंकि चुनाव शुरू हो गए थे।
लेकिन यह यूपीए सरकार ही थी जिसने कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया शुरू की और उसका अनुबंध रद किया। इसके अलावा हमने मामले की सीबीआई जांच शुरू करवाई और मिलान की अदालत में बैंक गारंटी की रकम को सीज करवाने के लिए प्रयास किया।