संसद के मानसून सत्र के दौरान 17वीं लोकसभा के छठे सत्र में केवल 21 घंटे ही काम हुआ। वहीं, 74 घंटे से अधिक का समय बर्बाद हुआ। अमर उजाला ने अपने पोल में पाठकों से सवाल पूछा था कि क्या समय की इस बर्बादी के लिए केंद्र सरकार जिम्मेदार है? इस सवाल पर आधे से कुछ अधिक पाठकों ने (50.19 फीसदी) जहां जवाब में हां कहा तो आधे से कुछ कम पाठकों ने (49.81 फीसदी) इससे सहमति नहीं जताई।
17वीं लोकसभा का यह छठा सत्र था। इसकी शुरुआत 19 जुलाई को हुई थी और यह तय तारीख 13 अगस्त से दो दिन पहले 11 अगस्त को ही समाप्त हो गया था। इस सत्र में बाधाओं और जबरन स्थगन के चलते कुल 74 घंटे 46 मिनट का समय बर्बाद हुआ। इस दौरान कुल 21 घंटे और 14 मिनट ही बैठकें चलीं। सभी छह सत्रों में इस सत्र में समय की बर्बादी सबसे ज्यादा हुई है। इसके अलावा इस दौरान कुल 17 बैठकें हुईं।