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TMC Leaders Pavan Varma and Ashok Tanwar: दोनों नेताओं से जानिए तृणमूल में उनके शामिल होने की वजह और पार्टी की आगे की नीतियों पर सब कुछ

प्रतिभा ज्योति
Updated Wed, 24 Nov 2021 01:55 PM IST

सार

मंगलवार को ट्विटर पर तृणमूल कांग्रेस ने कहा 'हम पवन वर्मा का हमारे तृणमूल कांग्रेस परिवार में स्वागत करने के लिए उत्साहित हैं। उनका समृद्ध राजनीतिक अनुभव हमें भारत के लोगों की सेवा करने और इस देश को और भी बेहतर दिनों में ले जाने में मदद करेगा'। जैसे-जैसे शाम ढलती रही, अशोक तंवर के भी पार्टी में शामिल होने की घोषणा कर दी गई। अमर उजाला डिजिटल ने इन दोनों नेताओं से विस्तार से बातचीत की। 
 
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पवन वर्मा और अशोक तंवर टीएमसी में शामिल हो गए हैं। - फोटो : Amar Ujala
पश्चिम बंगाल चुनाव में धमाकेदार जीत हासिल करने के बाद तृणमूल कांग्रेस अपनी पार्टी का विस्तार करने में लगी है। इसी कड़ी में कांग्रेस समेत दूसरी पार्टियों के नेताओं का टीएमसी में शामिल होने का सिलसिला भी जारी है। पश्चिम बंगाल में सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी दिल्ली में हैं और उनकी मौजदूगी में मंगलवार को कांग्रेस नेता कीर्ति आजाद, कांग्रेस की हरियाणा इकाई के पूर्व अध्यक्ष और पार्टी के पूर्व नेता  अशोक तंवर और जनता दल (यू) के पूर्व महासचिव पवन वर्मा भी टीएमसी में शामिल हुए। 

अमर उजाला डिजिटल ने पवन वर्मा और अशोक तंवर से बात करके यह जानने की कोशिश की है कि तृणमूल कांग्रेस में जाने की असली वजह क्या है और पार्टी की नीतियां और दूसरे राज्यों में विस्तार की योजना क्या है? हमने दोनों नेताओं से सभी मुद्दों पर बात की है।


पहले पेश है  पवन वर्मा से बातचीत के अंश....

पवन वर्मा राजनीति में आने से पहले भारतीय विदेश सेवा के अधिकारी रहे हैं। वे जेडीयू के कद्दावर नेताओं में गिने जाते थे और उन्हें बिहार के सीएम नीतीश कुमार का करीबी माना जाता था। वे नीतीश कुमार के सलाहकार भी रहे हैं। वर्मा को 2014 में राज्यसभा सदस्य बनाया गया और वे 2016 तक सांसद बने रहे। वे भाजपा और जेडीयू के गठबंधन के खिलाफ माने जाते थे। उन्होंने राष्ट्रीय नागरिकता पंजीकरण (एनआरसी) को लेकर जद (यू) के रुख का विरोध किया था जिसके बाद उन्हें राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर के साथ पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था। 


 
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पवन वर्मा और अशोक तंवर टीएमसी में शामिल हो गए हैं। - फोटो : Amar Ujala
पश्चिम बंगाल चुनाव में धमाकेदार जीत हासिल करने के बाद तृणमूल कांग्रेस अपनी पार्टी का विस्तार करने में लगी है। इसी कड़ी में कांग्रेस समेत दूसरी पार्टियों के नेताओं का टीएमसी में शामिल होने का सिलसिला भी जारी है। पश्चिम बंगाल में सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी दिल्ली में हैं और उनकी मौजदूगी में मंगलवार को कांग्रेस नेता कीर्ति आजाद, कांग्रेस की हरियाणा इकाई के पूर्व अध्यक्ष और पार्टी के पूर्व नेता  अशोक तंवर और जनता दल (यू) के पूर्व महासचिव पवन वर्मा भी टीएमसी में शामिल हुए। 

अमर उजाला डिजिटल ने पवन वर्मा और अशोक तंवर से बात करके यह जानने की कोशिश की है कि तृणमूल कांग्रेस में जाने की असली वजह क्या है और पार्टी की नीतियां और दूसरे राज्यों में विस्तार की योजना क्या है? हमने दोनों नेताओं से सभी मुद्दों पर बात की है।

पहले पेश है  पवन वर्मा से बातचीत के अंश....

पवन वर्मा राजनीति में आने से पहले भारतीय विदेश सेवा के अधिकारी रहे हैं। वे जेडीयू के कद्दावर नेताओं में गिने जाते थे और उन्हें बिहार के सीएम नीतीश कुमार का करीबी माना जाता था। वे नीतीश कुमार के सलाहकार भी रहे हैं। वर्मा को 2014 में राज्यसभा सदस्य बनाया गया और वे 2016 तक सांसद बने रहे। वे भाजपा और जेडीयू के गठबंधन के खिलाफ माने जाते थे। उन्होंने राष्ट्रीय नागरिकता पंजीकरण (एनआरसी) को लेकर जद (यू) के रुख का विरोध किया था जिसके बाद उन्हें राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर के साथ पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था। 


 

पवन वर्मा - फोटो : ANI
सवाल:  तृणमूल कांग्रेस ज्वाइन करने की असली वजह क्या है? 

जवाब:  जद (यू) छोड़ने के बाद, मैंने हमेशा सोचा कि देश को एक मजबूत विपक्ष की आवश्यकता होती है। मेरा मानना है कि देश में टीएमसी एक मजबूत ताकत बनकर उभर रही है। पश्चिम बंगाल चुनाव जीतने के बाद ममता बनर्जी का नेतृत्व ऊर्जावान नजर आ रहा है। वे एक हिम्मती महिला हैं और उनमें  विपक्ष की एकमात्र सर्वमान्य नेता बनने के सारे गुण हैं। तृणमूल कांग्रेस भाजपा का कड़ा विरोध करती है। इसलिए यह पार्टी  एक मजबूत विपक्ष बनने की राह पर है जो सत्ताधारी पार्टी की देश विरोधी और जनता विरोधी नीतियों का सख्ती से जवाब दे सकती है। इसलिए मैंने टीएमसी में शामिल होने का फैसला किया, क्योंकि यह बात अब सब स्वीकार करने लगे हैं कि देश में केवल ममता बनर्जी ही एकमात्र ऐसी नेता हैं जो भाजपा को टक्कर दे सकती हैं। ममता बनर्जी 2024 के लोकसभा चुनाव में राष्ट्रीय राजनीति का हिस्सा बनेगीं। 

सवाल: आप मानते हैं कि कांग्रेस एक मजबूत विपक्ष की भूमिका नहीं निभा रहा?

जवाब:  कांग्रेस के हालात पर मैं क्या टिप्पणी करुंगा, अपनी स्थिति वो खुद ही बयां कर रही है। लेकिन इतना जरूर कहूंगा कांग्रेस जिस तरह से बिखर गई और राज्यों में सिमट रही है, वैसी स्थिति में दूसरी मजबूत ताकतें चुपचाप नहीं बैठी रह सकतीं। देशव्यापी और राष्ट्रव्यापी विपक्ष की मांग लोकतांत्रिक है, जिसके लिए किसी न किसी पार्टी को आगे आना ही होगा। सत्ता पर किसी का स्थायी अधिकार न हो सकता है और ना होना चाहिए। टीएमसी बंगाल के दायरे से बाहर निकलकर राष्ट्रव्यापी विपक्ष बनने की दिशा में आगे बढ़ रही है। 

सवाल: टीएमसी का राष्ट्रीय स्वरुप कैसा होगा? क्या पार्टी सभी राज्यों में अपना संगठन बनाएगी? जवाब:

जवाब: टीएमसी को आप जल्दी ही एक नए राष्ट्रीय स्वरुप में देखेंगे। हर प्रदेश के लिए अलग-अलग नीतियां होंगी और हर राज्य में इसके मजबूत संगठन का निर्माण होगा। बिहार, उत्तर प्रदेश या चाहे आप जिस भी राज्य की बात कर लें वहां टीएमसी का संगठन जरूर मिलेगा।

 

प्रशांत किशोर व पवन वर्मा - फोटो : PTI
सवाल: आप प्रशांत किशोर के साथ जद (यू) में रहे हैं। किशोर ममता के सलाहकार रहे हैं। कड़ियां यह जोड़ी जा रही है कि आप बिहार में जद (यू) को कमजोर करने के लिए वहां काम करेंगे?

जवाब: मैं किसी को कमजोर करने के लिए नहीं, बल्कि टीएमसी को मजबूत करने के लिए काम करुंगा। फिर चाहे बिहार के लिए जिम्मेदारी दी जाए या राष्ट्रीय स्तर की। अभी तो मैं पार्टी में शामिल हुआ हूं, लेकिन पार्टी जो भी जिम्मेदारी देगी, उसे निभाऊंगा। 

सवाल:  भाजपा, कांग्रेस समेत कई दूसरी पार्टियों के नेता टीएमसी में शामिल हो रहे हैं इसमें प्रशांत किशोर की बड़ी भूमिका मानी जा रही है। क्या आपको भी किशोर ने पार्टी में शामिल होने के लिए मनाया।

जवाब: यह तो आप प्रशांत किशोर से पूछिए। पूरे प्रकरण से यह अनुमान लगाया जा सकता है। मेरा मानना है कि पीके की जो राजनीतिक समझ है और उनका जो अनुभव है उससे पार्टी को फायदा अवश्य मिल रहा है। 

सवाल: जद(यू) से रिश्ते खराब होने की वजह क्या रही?  

जवाब: नीतीश कुमार से मेरे आत्मीय संबंध रहे। उन्होंने मेरे लिए बहुत कुछ किया है। लेकिन जब बात सिद्धांतों की आती है तो समझौता नहीं किया जा सकता। मैं एनआरसी का विरोध कर रहा था। मेरे साथ प्रशांत किशोर भी इसका विरोध कर रहे थे। हम सिद्धांतों से समझौता नहीं कर पा रहे थे और हम दोंनों को एक साथ पार्टी से निष्कासित कर दिया गया। इस तरह मुझे नीतीश कुमार से दूरी बनानी पड़ी।

अशोक तंवर टीएमसी में शामिल हुए - फोटो : Twitter : @@AITCofficial
अशोक तंवर- हरियाणा के तेज-तर्रार युवा नेताओं में गिने जाने वाले तंवर सिरसा लोकसभा सीट से सांसद रह चुके हैं। उन्हें राहुल गांधी का करीबी माना जाता था। वह हरियाणा प्रदेश कांग्रेस समिति के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। साल 2019 में हरियाणा विधानसभा चुनाव के समय उन्होंने टिकट वितरण में अनियमितता और भ्रष्टाचार का आरोप लगाया था। जिसके बाद उन्हें कांग्रेस छोड़नी पड़ी। कांग्रेस से अलग होने के बाद उन्होंने खुद की पार्टी अपना भारत मोर्चा बनाई थी। 

सवाल: टीएमसी में ऐसा क्या दिखा कि आपको इस पार्टी में शामिल होना मुफीद लगा? 

जवाब: टीएमसी में भाजपा से टकराने की कुव्वत और क्षमता है। पूरे देश में एक ममता बनर्जी ही हैं जो पीएम मोदी से टकरा सकती हैं। हम पहले भी भाजपा से ही लड़ रहे थे और अब दीदी (ममता बनर्जी) का हाथ मजबूत करने के लिए उनके साथ आ गए हैं। देश के लिए कुछ करना है तो इसके लिए टीएमसी से बड़ी पार्टी कोई नहीं। जमीनी नेता, सादगी, समर्पण और देश भावना को देखें तो विपक्ष के चेहरा के लिए ममता बनर्जी से उपर्युक्त चेहरा कोई नहीं। 

सवाल: आपके इस फैसले को लेकर हरियाणा में क्या प्रतिक्रिया मिल रही है? 

जवाब:  सिर्फ हरियाणा ही नहीं बल्कि जबसे मैंने टीएमसी ज्वाइन की है, मुझे देश भर से बधाईयां मिल रही हैं और खासतौर पर नौजवानों ने मेरे फैसले को बहुत सही ठहराया है। इससे मुझे ताकत मिली है।
 

अशोक तंवर - फोटो : फाइल फोटो
सवाल: क्या भाजपा में आपको विकल्प नहीं मिला या हरियाणा की दूसरी पार्टियों में आपको भविष्य नजर नहीं आया? 

जवाब: जो किसानों के हितैषी हैं, श्रमिकों के साथ हैं, नौजवानों की बेरोजगारी दूर करना चाहते हैं उनके लिए एकमात्र भविष्य टीएमसी में है। लोगों ने भाजपा का किसान विरोधी चेहरा देख लिया है। भाजपा को हराने के लिए टीएमसी ही एकमात्र विकल्प बन सकती है। कांग्रेस तो सांठगांठ की राजनीति कर रही हैं और वह दिनों-दिन कमजोर होती जा रही है।  

सवाल: तृणमूल कांग्रेस हरियाणा में अपना विस्तार किस तरह करेगी?

जवाब: कल जब मैंने दीदी (ममता बनर्जी) की मौजूदगी में पार्टी ज्वाइन की तो उन्होंने ‘जय हरियाणा’ कहा। उन्होंने कहा बंगाल से हरियाणा दूर नहीं।  इससे आप समझ लीजिए कि पार्टी की योजना क्या है? हम हरियाणा में संगठन बनाएंगे और इतना ही नहीं 2024 के चुनाव में 10 में से 10 सीटें जीत कर दिखाएंगे। 

 

पूर्व कांग्रेस नेता अशोक तंवर - फोटो : Amar Ujala
सवाल: आपका यह दावा अतिउत्साह में दिया बयान नहीं लग रहा? 

जवाब: बिल्कुल नहीं। बल्कि पूरे होशो-हवास में कर रहा हूं कि हम हरियाणा में लोकसभा की 10 सीटें लाएंगे। जब 2014 में भाजपा ने हरियाणा में 10 सीटें जीतीं थीं तब उसका संगठन हरियाणा में कितना मजबूत था? हम मेहनत करेंगे। टीएमसी में इतने कर्तव्यनिष्ठ कार्यकर्ता हैं कि वे हरियाणा में बिल्कुल जमीन से शुरुआत करने को तैयार हैं। अब भाजपा और कांग्रेस के साथ हरियाणा में हमारी लड़ाई शुरू हो गई है। अब हम कांग्रेस को मुख्य विपक्षी पार्टी नहीं बनने देंगे। यूं समझ लीजिए कि भाजपा से टकराना और कांग्रेस को रोकना अब हमारा लक्ष्य है।  

सवाल: आपकी भूमिका हरियाणा में क्या होगी? 

जवाब: जैसा आपको बताया कि पूरे प्रदेश में टीएमसी का संगठन बनाना हमारी प्राथमिकता है। इसके अलावा पार्टी राष्ट्रीय स्तर पर भी जो भूमिका निभाने को कहेगी, मैं उसके लिए तैयार हूं। अभी गोवा चुनाव पर ध्यान केंद्रित करना है। 
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